चीन से खाली जगह, भारत के लिए बढ़ा अपैरल एक्सपोर्ट का मौका
रिपोर्ट के अनुसार, चीन की घटती हिस्सेदारी से वैश्विक सोर्सिंग में करीब 50-60 अरब डॉलर का वॉल्यूम दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के लिए उपलब्ध हुआ है। अब भारत के लिए इस अवसर को हासिल करने की संभावना बेहतर बाजार पहुंच, सप्लाई चेन डायवर्सिफिकेशन और नए व्यापार समझौतों से जुड़ी है।
भारत की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री को सरकार की PLI और PM MITRA जैसी योजनाओं के साथ-साथ नए मुक्त व्यापार समझौतों से बाजार पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ से अधिक रहे।
हालांकि, भारत के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। PL Capital के मुताबिक, देश में गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता अभी काफी बिखरी हुई है, जबकि बड़े वैश्विक ब्रांड कम लेकिन बड़े और भरोसेमंद सप्लायर्स के साथ काम करने पर जोर दे रहे हैं। तेज डिलीवरी, लागत, तकनीक, मैन-मेड फाइबर और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन में सुधार भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण बताए गए हैं।
इस बीच बांग्लादेश के गारमेंट सेक्टर पर ऊर्जा संकट का दबाव भी सामने आया है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में 134 निटवेयर फैक्ट्रियों के सर्वे में 78% ने आंशिक उत्पादन बाधित होने और 55% ने खरीदारों द्वारा ऑर्डर घटाने या रद्द करने की बात कही। इससे वैश्विक खरीदारों के लिए वैकल्पिक सोर्सिंग देशों की भूमिका पर भी ध्यान बढ़ सकता है।



