यूरोप में गैस के दाम 70% बढ़े, भारत पर क्या होगा असर?
यूरोप में LNG की आपूर्ति पर दबाव और सर्दियों से पहले गैस भंडारण की धीमी गति ने कीमतों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। Goldman Sachs के अनुसार, फारस की खाड़ी से LNG निर्यात अभी युद्ध से पहले के स्तर का करीब 15–25% ही है। यदि आपूर्ति सामान्य होने में देरी होती है तो यूरोपीय गैस बाजार में और तेजी देखने को मिल सकती है।
भारत के लिए इसका असर वैश्विक LNG बाजार और आयात लागत के माध्यम से देखा जा सकता है। यूरोप और एशिया में LNG की मांग बढ़ने पर उपलब्ध कार्गो के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे एशियाई खरीदारों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, भारत पर वास्तविक प्रभाव वैश्विक LNG आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय कीमतों, घरेलू मांग और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा। IEA ने भी 2026 में मध्य-पूर्व से LNG आपूर्ति में व्यवधान के कारण वैश्विक गैस बाजार में अस्थिरता दर्ज की है।
Goldman Sachs का आकलन यह भी है कि यदि फारस की खाड़ी से LNG प्रवाह तेजी से सामान्य होता है तो कीमतें तेजी से नीचे आ सकती हैं। वहीं, बेहद कम सर्दियों की आपूर्ति की स्थिति में यूरोपीय गैस की पीक-विंटर कीमत €100 प्रति MWh से ऊपर जाने की संभावना का अनुमान दिया गया है।



