भारत बना जापानी कंपनियों का नया मैन्युफैक्चरिंग हब, टोयोटा-होंडा ने बढ़ाया निवेश, चीन की टेंशन बढ़ी

भारत की आर्थिक प्रगति और उद्योग क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं ने अब जापानी कंपनियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। खासकर ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिग्गज कंपनियां टोयोटा (Toyota) और होंडा (Honda) ने भारत को अपना प्रमुख प्रोडक्शन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस रणनीति को विशेषज्ञ चीन के लिए “आर्थिक झटका” मान रहे हैं, क्योंकि जापान अब अपनी उत्पादन श्रृंखला को धीरे-धीरे चीन से हटाकर भारत में स्थापित कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन और होंडा मोटर्स ने भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए हजारों करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। टोयोटा कर्नाटक और तमिलनाडु में अपने संयंत्रों का विस्तार कर रही है, वहीं होंडा गुजरात और राजस्थान में नई यूनिट्स स्थापित कर रही है। इन फैसलों के पीछे मुख्य कारण है — भारत की कुशल कार्यबल, स्थिर नीतियां और विशाल घरेलू बाजार।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही भारत धीरे-धीरे एशिया का ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनने की ओर अग्रसर है।
जापानी कंपनियों के इस कदम ने चीन को चिंता में डाल दिया है। दरअसल, अब तक जापानी उद्योगों का बड़ा हिस्सा चीन में केंद्रित था, लेकिन कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के बाद कंपनियां सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन की नीति पर काम कर रही हैं। भारत उन्हें एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में दिख रहा है।
सरकार के अनुसार, जापान के साथ भारत के आर्थिक संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। बीते दो वर्षों में जापानी निवेश में करीब 40% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच नई तकनीकी साझेदारियों, EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) प्रोजेक्ट्स और बैटरी उत्पादन इकाइयों की स्थापना पर भी चर्चा जारी है।
कुल मिलाकर, जापानी कंपनियों का भारत की ओर झुकाव न केवल देश की औद्योगिक ताकत को नया आयाम देगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि भारत अब एशिया की नई आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है — जिसने ड्रैगन (चीन) की नींद उड़ा दी है।



