RBI Repo Rate: अक्टूबर-दिसंबर में बढ़ सकती है ब्याज दर
भारत में महंगाई के आंकड़ों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों के दबाव के बीच RBI की ब्याज दर नीति पर बाजार की नजर बनी हुई है। Nomura के प्रमुख अर्थशास्त्री रॉब सुब्बारामन ने कहा है कि केंद्रीय बैंक अक्टूबर और दिसंबर में ब्याज दर बढ़ा सकता है।
Nomura के अनुमान के मुताबिक दोनों बैठकों में 25-25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट कुल 50 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 5.75% तक पहुंच सकता है। Nomura ने यह अनुमान महंगाई में संभावित तेजी को देखते हुए बदला है।
महंगाई 6% के पार जाने का अनुमान
Nomura का अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर के दौरान भारत की हेडलाइन महंगाई 6% की सीमा तक पहुंच सकती है या उसे पार कर सकती है। अगस्त में CPI महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई थी, जो जुलाई के 4.45% से अधिक थी। खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई भी बढ़ी है।
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार कुछ अन्य अर्थशास्त्रियों ने भी अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस प्वाइंट की दर बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। HSBC ने भी कुल 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान दिया है।
कच्चे तेल की कीमत भी बड़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत के लिए महंगाई का एक महत्वपूर्ण जोखिम है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि से आयात लागत और घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
सितंबर में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की स्थिति ने भी महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे में RBI को ब्याज दरों से जुड़े फैसले में घरेलू महंगाई के साथ वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी नजर रखनी होगी।
अमेरिका के फैसले का भी असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। Nomura के अनुसार अमेरिका में भी इस साल एक और दर बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव से भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दर का अंतर प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा डॉलर की मजबूती और रुपये की विनिमय दर भी RBI के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। वैश्विक दरों और घरेलू महंगाई में एक साथ बदलाव होने पर मौद्रिक नीति के सामने चुनौती बढ़ सकती है।
क्या बढ़ेगी आपकी EMI?
अगर RBI वास्तव में रेपो रेट बढ़ाता है, तो बाहरी बेंचमार्क से जुड़े फ्लोटिंग रेट वाले कुछ होम लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं। हालांकि, रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर कर्जदार की EMI तुरंत और समान राशि से बढ़ जाएगी।
आपकी EMI पर असर बैंक की ब्याज दर, लोन की बकाया राशि, शेष अवधि और ब्याज दर रीसेट की शर्तों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल केवल Nomura के अनुमान के आधार पर EMI बढ़ने को निश्चित नहीं माना जा सकता।
RBI का फैसला किन बातों पर निर्भर करेगा?
रेपो रेट का वास्तविक फैसला RBI की Monetary Policy Committee यानी MPC करेगी। महंगाई के अलावा आर्थिक वृद्धि, खाद्य और ईंधन कीमतें, रुपये की स्थिति, वैश्विक ब्याज दरें और सिस्टम में नकदी जैसे कई कारक निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
RBI की 2026-27 की निर्धारित MPC बैठकों में अक्टूबर की बैठक 5-7 अक्टूबर और दिसंबर की बैठक 2-4 दिसंबर 2026 को होनी है।
इसलिए अक्टूबर-दिसंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी फिलहाल विशेषज्ञों का अनुमान है, RBI की घोषित नीति नहीं। आने वाले महंगाई आंकड़े और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां इस अनुमान की दिशा को बदल सकती हैं।



