बजट 2026 से चावल एक्सपोर्टर्स को उम्मीद, टैक्स इंसेंटिव और सस्ता कर्ज बढ़ाएगा निर्यात

Union Budget 2026 से पहले देश के चावल निर्यातकों ने केंद्र सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें टैक्स इंसेंटिव, कर्ज पर ब्याज सब्सिडी और निर्यात से जुड़ी नीतियों में स्थिरता शामिल है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देशों में शामिल है और बासमती व नॉन-बासमती चावल की वैश्विक मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में बढ़ती लागत, ऊंची ब्याज दरें और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता के कारण निर्यातकों पर दबाव बढ़ा है। एक्सपोर्टर्स का कहना है कि कच्चे माल, परिवहन, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत में भारी इजाफा हुआ है, जिससे मार्जिन कम हो गया है। ऐसे में बजट 2026 में यदि सरकार टैक्स इंसेंटिव देती है, जैसे निर्यात आय पर अतिरिक्त छूट या कुछ टैक्स दरों में कमी, तो इससे भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी। इसके साथ ही निर्यातकों ने कर्ज पर ब्याज सब्सिडी की मांग भी तेज कर दी है। उनका तर्क है कि MSME सेक्टर से जुड़े कई छोटे और मध्यम चावल निर्यातक ऊंची ब्याज दरों के कारण विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। यदि निर्यात ऋण पर ब्याज सब्सिडी या सस्ता क्रेडिट उपलब्ध कराया जाता है, तो इससे नई इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा और निर्यात वॉल्यूम में इजाफा होगा। एक्सपोर्टर्स यह भी चाहते हैं कि सरकार निर्यात नीतियों में बार-बार बदलाव से बचे, क्योंकि अचानक प्रतिबंध या शुल्क में परिवर्तन से अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों का भरोसा प्रभावित होता है। स्थिर और दीर्घकालिक नीति से भारत की छवि एक भरोसेमंद सप्लायर के रूप में और मजबूत हो सकती है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर और पोर्ट सुविधाओं में सुधार, तेज कस्टम क्लीयरेंस और डिजिटल प्रक्रियाओं को सरल बनाने की भी मांग की गई है। चावल निर्यात उद्योग का मानना है कि यदि बजट 2026 में इन मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए जाते हैं, तो न केवल कृषि आधारित निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर, Union Budget 2026 चावल निर्यातकों के लिए एक अहम अवसर बन सकता है, जिससे भारत वैश्विक चावल बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति को और सुदृढ़ कर सके।



