‘अर्जियां’ की एक लाइन लिखने में लगा 1 साल, प्रसून जोशी ने सुनाई कहानी

कुछ गाने सिर्फ सुने नहीं जाते, बल्कि सीधे दिल को छू जाते हैं। फिल्म ‘दिल्ली-6’ का ‘अर्जियां’ भी ऐसा ही एक गीत है। इस गाने के पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है, जिसे गीतकार प्रसून जोशी ने हाल ही में साझा किया।
प्रसून जोशी के मुताबिक ‘अर्जियां’ लिखना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि गाने की एक खास लाइन को सही रूप देने में उन्हें करीब एक साल लग गया। वह बार-बार शब्द लिखते, उन्हें बदलते और फिर नए तरीके से सोचते रहे, लेकिन उन्हें मन के मुताबिक भाव नहीं मिल पा रहा था।
इस गाने की प्रेरणा उन्हें अपने बचपन की एक याद से मिली। प्रसून जोशी ने बताया कि वह बचपन में रामपुर में रहते थे और स्कूल जाते समय रास्ते में एक दरगाह पड़ती थी। वहां उन्हें अक्सर एक बुजुर्ग महिला दिखाई देती थीं।
उस महिला के माथे की गहरी लकीरें प्रसून जोशी के मन में बस गई थीं। एक दिन अचानक उन्हें लगा कि ये लकीरें किसी दरार की तरह हैं और जैसे उनसे कोई कह रहा हो कि इनकी मरम्मत कर दो। इसी विचार ने उनके मन में गाने की बेहद खूबसूरत पंक्ति का जन्म किया।
इसके बाद प्रसून जोशी ने अपनी कल्पना को शब्दों में पिरोया और गाने में तकदीर और दुआ का भाव सामने आया। उनके लिखे शब्दों ने ‘अर्जियां’ को सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक ऐसी प्रार्थना का रूप दिया जिसे सुनकर श्रोता भावुक हो जाते हैं।
गाने को ए. आर. रहमान ने संगीत दिया, जबकि इसे जावेद अली और कैलाश खेर ने अपनी आवाज दी। रहमान के सूफियाना संगीत और प्रसून जोशी की गहराई से लिखी पंक्तियों ने मिलकर गीत को खास बना दिया। ‘अर्जियां’ 2009 में रिलीज हुई फिल्म ‘दिल्ली-6’ का हिस्सा था।
प्रसून जोशी ने अमिताभ बच्चन के सामने भी इस गाने से जुड़ा यह किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आखिरकार सही भाव और शब्द मिले तो उन्होंने उसे ए. आर. रहमान के साथ साझा किया। इसके बाद दोनों की रचनात्मक साझेदारी ने गाने को यादगार बना दिया।
‘अर्जियां’ की यह कहानी बताती है कि एक महान गीत के पीछे सिर्फ शब्द और धुन नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी यादें, भावनाएं और अनुभव भी छिपे हो सकते हैं। प्रसून जोशी के लिए दरगाह के बाहर दिखी एक बुजुर्ग महिला की तस्वीर ने ऐसी प्रेरणा दी, जिसने हिंदी सिनेमा को एक यादगार गीत दे दिया।



