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छठ गीत: हो दीनानाथ, पहिले पहिल छठी मैया – छठ पूजा के रंगीन और भावपूर्ण गीत

छठ पूजा, भारतीय उपमहाद्वीप का एक अनूठा पर्व, मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। इस पर्व की सबसे खूबसूरत परंपरा हैं इसके छठ गीत। इनमें से “हो दीनानाथ, पहिले पहिल छठी मैया” जैसे गीत सुनते ही श्रद्धालु भावविभोर हो जाते हैं और रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

छठ गीत मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया की स्तुति में गाए जाते हैं। ये गीत पारंपरिक लोकसंगीत की मधुरता और भक्ति भाव का अद्भुत मिश्रण होते हैं। जैसे ही घाटों पर महिलाएं और पुरुष इन गीतों को गाना शुरू करते हैं, वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। गीतों में छठ पूजा की तैयारियों, उपवास, डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की भक्ति, और परिवार की खुशहाली की कामना का वर्णन होता है।

“हो दीनानाथ, पहिले पहिल छठी मैया” जैसे गीत छठ पूजा की सुबह विशेष रूप से गाए जाते हैं। इन गीतों में भक्तों का भाव और भक्ति इतनी प्रगाढ़ होती है कि सुनने वाले का हृदय स्वतः ही आध्यात्मिक अनुभव में लीन हो जाता है। गीतों के शब्द और लय श्रद्धालुओं को सूर्य की ओर झुकाने और छठी मैया की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।

छठ गीतों का इतिहास सदियों पुराना है और ये पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होते आए हैं। भोजपुरी और मगही भाषा में गाए जाने वाले ये गीत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी हैं। छठ गीतों की मिठास, भाव और संगीत की सरलता इसे सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए प्रिय बनाती है।

इसलिए, छठ पूजा में यदि इन पारंपरिक गीतों का महत्व और भावना न हो तो पर्व अधूरा सा लगता है। ये गीत न केवल श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श करते हैं, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना भी पैदा करते हैं। हर साल छठ गीतों की मधुर ध्वनि के साथ सूर्य देव और छठी मैया के प्रति असीम श्रद्धा का अनुभव हर दिल में जीवित रहता है।

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