दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों – अमेरिका और रूस – के बीच तनाव अब एक नई ऊंचाई पर पहुंचता दिख रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला है, जिससे न केवल वैश्विक कूटनीति हिल गई है, बल्कि परमाणु हथियारों की होड़ को लेकर भी चिंताएं गहराने लगी हैं। रूस ने हाल ही में 38 साल पुरानी एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता (INF Treaty) को औपचारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा कर दी है।
यह कदम ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका में ट्रंप की राजनीति एक बार फिर सक्रिय हो रही है और 2024 के बाद से उनके विदेश नीति को लेकर वैश्विक मंच पर चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) Treaty वर्ष 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हुई थी, जिसका उद्देश्य मध्यम दूरी की परमाणु मिसाइलों पर प्रतिबंध लगाना था। इस संधि ने शीत युद्ध के दौर में हथियारों की दौड़ पर ब्रेक लगाने का काम किया था।
पुतिन ने इस समझौते को तोड़ने के पीछे “अमेरिका की नीतियों और सुरक्षा संतुलन में एकतरफा लाभ उठाने की कोशिश” को वजह बताया है। रूस का आरोप है कि अमेरिका द्वारा किए जा रहे नए हथियार परीक्षण और तैनाती, संधि के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहे हैं। इसीलिए, रूस अब खुद को किसी भी प्रतिबंध से मुक्त मानता है।
अब क्या होगा?
इस निर्णय के बाद सबसे बड़ा खतरा है कि एक नई परमाणु हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है। यदि अमेरिका भी इसी रास्ते पर चलता है, तो वैश्विक स्तर पर रणनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्रों में नए मिसाइल सिस्टम्स की तैनाती हो सकती है, जिससे शांति और सुरक्षा पर संकट मंडरा सकता है।
ट्रंप को क्यों माना जा रहा है टारगेट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह कदम ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर और अप्रत्याशित नेता साबित करने की रणनीति हो सकता है। ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने कई अंतरराष्ट्रीय संधियों से खुद को अलग किया था – जिनमें पेरिस जलवायु समझौता और ईरान परमाणु डील शामिल हैं। पुतिन अब उन्हीं नीतियों को लेकर अमेरिका को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर जब ट्रंप की चुनावी राजनीति फिर से सक्रिय हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
NATO देशों और संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। यूरोपीय संघ ने रूस से अपील की है कि वह समझौतों के प्रति प्रतिबद्ध रहे और “गैर-हथियार आधारित संवाद” को प्राथमिकता दे। वहीं अमेरिका ने फिलहाल संयम बरतते हुए कहा है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
निष्कर्ष:
पुतिन का यह मास्टरस्ट्रोक न केवल ट्रंप की विदेश नीति के प्रभाव को सवालों के घेरे में लाता है, बल्कि यह पूरी दुनिया को नई हथियारों की दौड़ के मुहाने पर भी ला खड़ा करता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया क्या होती है और क्या दुनिया एक बार फिर शीत युद्ध जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही है।



