हाल ही में जापान सागर में चीन और रूस ने एक गुप्त सैन्य अभ्यास (सीक्रेट मिलिट्री रिहर्सल) की शुरुआत की है, जिसने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है। यह सैन्य अभ्यास न केवल सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे छिपे रणनीतिक इरादों ने अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इस रिहर्सल के माध्यम से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (चिनफिंग) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सैन्य प्रभुत्व और राजनीतिक दबदबे को बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
यह सैन्य अभ्यास पूरी तरह से गुप्त रखा गया था और इसकी आधिकारिक पुष्टि भी देर से हुई। इसमें चीन और रूस की नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत, पनडुब्बियाँ, एयरक्राफ्ट और मिसाइल सिस्टम शामिल हैं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह एक “संदेशात्मक अभ्यास” है — जिसका उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को यह दिखाना है कि चीन और रूस की संयुक्त सैन्य ताकत अब एशिया में किसी भी चुनौती का मुकाबला करने में सक्षम है।
पुतिन और जिनपिंग का यह कदम उस समय सामने आया है जब विश्व पहले से ही यूक्रेन युद्ध, ताइवान तनाव और दक्षिण चीन सागर में विवादों से जूझ रहा है। ऐसे में जापान सागर में यह संयुक्त सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़ा कर रहा है। अमेरिका पहले ही चेतावनी दे चुका है कि चीन और रूस का यह बढ़ता हुआ रक्षा सहयोग वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
सैन्य अभ्यास की प्रमुख गतिविधियों में एंटी-शिप और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन, एयर डिफेंस ट्रेनिंग और सामूहिक समुद्री गश्त शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, यह ड्रिल सिर्फ अभ्यास भर नहीं है, बल्कि भविष्य में संभावित संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों का पूर्वाभ्यास भी है। इससे यह भी अंदाजा लगाया जा रहा है कि चीन और रूस न केवल रणनीतिक रूप से बल्कि सैन्य दृष्टि से भी एक-दूसरे पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पुतिन और जिनपिंग इस गठजोड़ के ज़रिये अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी गठबंधन के दबाव का सामूहिक रूप से मुकाबला करना चाहते हैं। दोनों देशों की यह साझेदारी आर्थिक, राजनीतिक और अब सैन्य स्तर पर भी मज़बूत होती दिख रही है। यह एक नया भू-राजनीतिक समीकरण बन रहा है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
इस रिहर्सल ने यह साफ कर दिया है कि एशिया में शक्ति संघर्ष अब केवल आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि सामरिक स्तर पर भी तेज़ी पकड़ रहा है। जापान सागर में हो रही यह सीक्रेट ड्रिल एक संकेत है कि चीन और रूस आने वाले समय में मिलकर एक बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में हैं — और दुनिया को इसके लिए तैयार रहना होगा।



