
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के एक प्रमुख जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (Industrial Corridor) के लिए कुल 292 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने इस परियोजना के लिए तीन गांवों की जमीनों को प्राथमिक रूप से चिह्नित कर लिया है और सर्वे का काम तेजी से जारी है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की नई औद्योगिक नीति के तहत राज्य को “इंडस्ट्रियल हब” बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।
जानकारी के अनुसार, जिन तीन गांवों की भूमि को अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया गया है, वे जिले के बाहरी इलाके में स्थित हैं, जहां परिवहन और सड़क संपर्क की बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह इलाका राज्य के औद्योगिक गलियारे का हिस्सा बनेगा, जिससे निवेशकों को सुगम लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
जिला प्रशासन ने भूमि स्वामियों से बातचीत शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि किसानों को भूमि के बदले सरकार की निर्धारित दर से अधिक मुआवजा दिया जाएगा ताकि किसी तरह का विरोध या विवाद उत्पन्न न हो। इसके अलावा, जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित होगी, उन्हें पुनर्वास पैकेज और वैकल्पिक रोजगार के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे।
इस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, और फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों के निवेश की संभावना जताई जा रही है। राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क भी शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी होने के बाद यहां बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य अगले वर्ष से आरंभ हो जाएगा।
इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि “उत्तर प्रदेश में उद्योगों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण तैयार किया जा रहा है। हर जिले को उसकी भौगोलिक स्थिति के अनुसार औद्योगिक पहचान दी जाएगी।”
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस कॉरिडोर से जिले में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र का आर्थिक परिदृश्य बदलेगा। हालांकि कुछ किसानों ने भूमि मूल्यांकन को लेकर अपनी शंकाएं भी जताई हैं, लेकिन प्रशासन का दावा है कि सभी को न्यायसंगत मुआवजा दिया जाएगा।



