
चीन और जापान के बीच दशकों से चली आ रही पांडा कूटनीति एक बार फिर चर्चा में है। चीन ने जापान में रह रहे अपने जुड़वा पांडा को वापस बुलाने का फैसला किया है, जिसके बाद जापान के लोगों में गहरी भावुकता देखने को मिल रही है। इन पांडा को देखने के लिए अंतिम दिनों में हजारों लोग चिड़ियाघर पहुंचे, ताकि वे अपनी पसंदीदा जोड़ी को आखिरी बार निहार सकें। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग पांडा के साथ बिताए पलों को कैमरों में कैद करते नजर आए।
जानकारी के अनुसार, ये जुड़वा पांडा चीन की ओर से जापान को दोस्ती और सांस्कृतिक सहयोग के प्रतीक के रूप में भेजे गए थे। करीब पांच दशकों से पांडा जापान की पहचान का हिस्सा बन चुके थे। टोक्यो और अन्य शहरों के चिड़ियाघरों में पांडा केवल एक जानवर नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा एक प्रतीक बन गए थे। यही वजह है कि जब चीन ने इन्हें वापस बुलाने की घोषणा की, तो जापान में मायूसी का माहौल छा गया।
पांडा संरक्षण से जुड़े समझौतों के तहत, चीन समय-समय पर अपने पांडा वापस बुलाता है या नए पांडा भेजता है। इस बार समझौते की अवधि पूरी होने के बाद चीन ने अपने जुड़वा पांडा को वापस लाने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पांडा संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत करने के उद्देश्य से यह कदम उठा रहा है।
जापान के नागरिकों के लिए यह क्षण बेहद भावुक है, क्योंकि 50 साल बाद देश ऐसा होगा जहां कोई भी विशाल पांडा मौजूद नहीं होगा। चिड़ियाघर प्रशासन ने विदाई के मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें पांडा से जुड़ी यादों को साझा किया गया। सोशल मीडिया पर भी पांडा की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहां लोग भावुक संदेश लिखते नजर आ रहे हैं।
हालांकि जापान सरकार और चिड़ियाघर प्रबंधन को उम्मीद है कि भविष्य में चीन के साथ नए समझौते के तहत फिर से पांडा जापान आ सकते हैं। फिलहाल, यह विदाई न केवल दो पांडा की है, बल्कि उस लंबे दौर की भी है जिसने चीन-जापान मैत्री को एक अलग पहचान दी।



