एआई मंथन 2026’ लखनऊ: विशेषज्ञों ने बताया कैसे AI बनेगा विकास और रोजगार का सहायक

लखनऊ में आयोजित ‘एआई मंथन 2026’ कार्यक्रम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर फैले भ्रम और डर को दूर करने का मजबूत संदेश दिया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए तकनीकी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि AI से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसे अपना सहयोगी बनाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI मानव क्षमताओं का विकल्प नहीं, बल्कि उनका विस्तार है, जो सही दिशा में उपयोग होने पर विकास और समृद्धि का बड़ा साधन बन सकता है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में AI हर क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा—चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, प्रशासन या स्टार्टअप इकोसिस्टम। AI के माध्यम से काम की गति तेज होगी, निर्णय अधिक सटीक होंगे और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाएगा। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर युवाओं और पेशेवरों को AI के साथ काम करना सिखाया जाए, तो रोजगार के नए अवसर भी तेजी से पैदा होंगे।
‘एआई मंथन 2026’ में इस बात पर भी विस्तार से चर्चा हुई कि AI को लेकर डर अक्सर जानकारी की कमी से पैदा होता है। वक्ताओं ने कहा कि जब नई तकनीक आती है, तो शुरुआती दौर में आशंकाएं स्वाभाविक होती हैं, लेकिन इतिहास गवाह है कि तकनीक ने हमेशा नए अवसर पैदा किए हैं। AI भी उसी कड़ी का हिस्सा है। जरूरत है कि सरकार, शिक्षा संस्थान और उद्योग मिलकर AI स्किल्स को आम लोगों तक पहुंचाएं।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश को AI हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि लखनऊ जैसे शहरों में तकनीकी सम्मेलन और मंथन कार्यक्रम युवाओं को प्रेरित करते हैं और उन्हें भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करते हैं। AI आधारित स्टार्टअप्स, स्मार्ट गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं के जरिए प्रदेश में विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है।
अंत में विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि AI कोई खतरा नहीं, बल्कि एक ताकत है। यदि इसे समझदारी, नैतिकता और सही प्रशिक्षण के साथ अपनाया जाए, तो AI भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। ‘एआई मंथन 2026’ ने यही जीत का मंत्र दिया—डर नहीं, दोस्ती; विरोध नहीं, सहयोग।



