
संयुक्त राज्य अमेरिका के ओरेगन में एक संघीय अदालत ने बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंट बिना न्यायाधीश द्वारा जारी वारंट के किसी अप्रवासी को गिरफ्तार नहीं कर सकते, जब तक कि उसके भागने का स्पष्ट जोखिम न हो।
कोर्ट ने यह निर्देश एक क्लास‑एक्शन मुकदमे के तहत दिया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि DHS की नीति — “पहले गिरफ्तार करो, बाद में वाजिब ठहराओ” — नागरिकों के ड्यू प्रोसेस के अधिकारों का उल्लंघन करती है। अदालत ने पाया कि कुछ मामलों में एजेंटों ने बिना वारंट या भागने की स्थिति जांचे लोगों को हिरासत में लिया था, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि उसके पास वैध कार्य परमिट और पेंडिंग वीजा था, फिर भी उसे तीन सप्ताह तक डिटेंशन में रखा गया।
न्यायाधीश मुस्तफा कसुभाई ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी किसी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं है। आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक मामला आगे कोर्ट में विचाराधीन है।



