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ऑस्ट्रेलिया में भारतीय युवक पर हमला, रीढ़ की हड्डी टूटी

ऑस्ट्रेलिया में एक बार फिर से भारतीय समुदाय को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक भारतीय युवक पर जानलेवा हमला हुआ। इस हमले में युवक की कलाई काट दी गई और पीठ में चाकू घोंपा गया, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, सम्मान और जीवन की गरिमा पर सीधा हमला है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए नस्लीय हिंसा या टारगेटेड अटैक अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय है।

घटना मेलबर्न शहर की बताई जा रही है, जहां 28 वर्षीय भारतीय युवक, जो वहां आईटी सेक्टर में काम करता था, पर रात करीब 10 बजे उस समय हमला हुआ जब वह ऑफिस से घर लौट रहा था। हमलावरों की संख्या दो बताई जा रही है, जिनमें से एक ने युवक को पीछे से पकड़ लिया और दूसरे ने पहले उसकी कलाई पर तेज धारदार हथियार से वार किया। जब युवक खुद को बचाने की कोशिश करने लगा तो हमलावर ने उसकी पीठ में चाकू से घातक वार कर दिया। इतने में वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने शोर मचाया, जिसके बाद हमलावर फरार हो गए।

स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने यह भी कहा कि यह हमला “नस्लीय रूप से प्रेरित” हो सकता है, हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। युवक को गंभीर हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर है और उसे कई सर्जरीज़ से गुजरना पड़ सकता है।

इस घटना से ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय में भारी रोष है। भारतीय उच्चायोग ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और स्थानीय प्रशासन से हमलावरों को जल्द पकड़ने और कड़ी कार्रवाई की मांग की है। भारत सरकार ने कहा है कि वह पीड़ित युवक और उसके परिवार को हरसंभव सहायता देगी। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ट्वीट कर कहा, “विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम ऑस्ट्रेलिया सरकार से इस घटना की निष्पक्ष और तेज़ जांच की अपेक्षा करते हैं।”

इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। #JusticeForIndian और #StopAttackingIndians जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक भारतीय नागरिक विदेशों में डर के साये में जीते रहेंगे? क्या प्रवासी होने का मतलब यह है कि कोई भी किसी भी समय हमला कर दे और कानून उन्हें पर्याप्त सुरक्षा न दे सके?

यह पहली बार नहीं है जब ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों पर हमला हुआ हो। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां भारतीय छात्रों, कामगारों और यहां तक कि व्यवसायियों को भी निशाना बनाया गया है। 2009-10 के दौरान मेलबर्न और सिडनी में भारतीय छात्रों पर लगातार हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया था। हालांकि तब ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कड़े कदम उठाए थे, लेकिन अब एक बार फिर ऐसी घटनाएं सामने आना चिंता की बात है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इन हमलों के पीछे केवल नस्लीय नफरत नहीं, बल्कि समाज में मौजूद आर्थिक असमानता, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं और अपराधियों में कानून का डर न होना भी प्रमुख कारण हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई सरकार यह दावा करती रही है कि उसका देश बहुसांस्कृतिक मूल्यों को सम्मान देता है और यहां रहने वाले सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी इससे मेल नहीं खा रही।

पीड़ित युवक के परिवार ने भारत से ऑस्ट्रेलिया सरकार से मांग की है कि दोषियों को जल्द पकड़ा जाए और उनके बेटे को मेडिकल व लीगल सहायता उपलब्ध कराई जाए। युवक की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमने अपने बेटे को एक बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेजा था, न कि अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच झूलने के लिए। हम चाहते हैं कि दोषियों को सजा मिले और किसी और का बेटा इस पीड़ा से न गुजरे।”

अब सवाल यह उठता है कि भारत सरकार और ऑस्ट्रेलिया सरकार मिलकर क्या ऐसा कोई ठोस तंत्र बना सकते हैं जिससे प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके? क्या भारतीय दूतावासों को और अधिक सशक्त नहीं किया जाना चाहिए ताकि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके? क्या विदेशों में रहने वाले भारतीयों को कोई हेल्पलाइन या सुरक्षा नेटवर्क नहीं मिलना चाहिए जो ऐसी स्थिति में तुरंत सक्रिय हो?

इस घटना ने सिर्फ एक युवक को घायल नहीं किया है, बल्कि लाखों प्रवासी भारतीयों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। इस समय जरूरत है कठोर और त्वरित कार्रवाई की ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि किसी भी भारतीय के खिलाफ हिंसा को भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय बर्दाश्त नहीं करेगा।

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