ऑस्ट्रेलिया की राजनीति उस समय हिल गई जब देश के एक पूर्व सांसद को दो अलग-अलग पुरुषों के साथ बलात्कार करने के तीन मामलों में अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया। इस घटना ने पूरे ऑस्ट्रेलिया को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला केवल यौन हिंसा का नहीं है, बल्कि सत्ता, पावर और राजनीति के दुरुपयोग की एक भयावह तस्वीर भी सामने लाता है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि यह घटना एक ही रात में तीन बार हुई थी, और पीड़ितों में से एक की गवाही ने पूरे मामले को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा दिया।
सांसद की पहचान फिलहाल कानून के तहत गोपनीय रखी गई है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपी लंबे समय तक सत्ता में एक प्रभावशाली भूमिका निभा चुका है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि सांसद ने शराब और प्रभाव का इस्तेमाल कर दो पुरुषों को अपने घर बुलाया और फिर उनके साथ जबरन यौन संबंध बनाए। इनमें से एक पीड़ित ने कहा कि वह उस रात बेहद डरा हुआ था और विरोध करने की स्थिति में नहीं था, क्योंकि उसे डर था कि सांसद उसका करियर और सामाजिक जीवन बर्बाद कर देगा।
कोर्ट ने इस बयान को गंभीरता से लेते हुए यह स्पष्ट किया कि सहमति के बिना किया गया कोई भी यौन संबंध अपराध की श्रेणी में आता है, चाहे पीड़ित पुरुष हो या महिला। इस केस की गूंज ऑस्ट्रेलियाई संसद तक भी पहुंची, जहां कुछ सांसदों ने खुलकर न्यायपालिका के इस कदम की सराहना की और यौन अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इस केस के सामने आने के बाद, ऑस्ट्रेलिया में यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानूनों और सजा की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे। कुछ लोगों का कहना है कि सत्ता में बैठे लोग अक्सर कानून से ऊपर समझे जाते हैं और ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है। लेकिन इस केस में कोर्ट ने जो रुख अपनाया है, वह एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
इस केस में खास बात यह रही कि यह घटना “एक ही रात में तीन बार” हुई, यानी आरोपी ने तीन बार अलग-अलग तरीकों से यौन हिंसा की। यह तथ्य न्यायालय में मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से प्रमाणित किया गया। जांच एजेंसियों ने आरोपी के घर से सीसीटीवी फुटेज, चैट रिकॉर्ड्स और कॉल डिटेल्स भी अदालत में पेश की, जिससे यह सिद्ध हो गया कि आरोपी ने पीड़ितों को झांसे में लेकर अपने घर बुलाया और फिर उनका यौन शोषण किया।



