बेंगलुरु से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसने एक बार फिर से साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक आईटी प्रोफेशनल को CBI अधिकारी बनकर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर इतना मानसिक दबाव दिया कि उसने आत्महत्या कर ली।
पीड़ित को एक कॉल आया जिसमें उसे बताया गया कि उसके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियों की जांच चल रही है। कॉल पर मौजूद व्यक्ति ने खुद को CBI अधिकारी बताया और वीडियो कॉल पर पूछताछ करते हुए डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू कर दिया। उसे कहा गया कि अगर वह सहयोग नहीं करेगा तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ठगों ने वीडियो कॉलिंग के जरिए पीड़ित को एक वर्चुअल रूम में घंटों तक रोके रखा, जिसे “डिजिटल अरेस्ट” कहा जा रहा है। इस दौरान उससे निजी जानकारी ली गई और धीरे-धीरे उसे डराकर 11 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
लगातार तनाव, शर्मिंदगी और डर के चलते पीड़ित ने खुदकुशी कर ली। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है जिसमें उसने स्पष्ट रूप से ठगी की बात और मानसिक दबाव का जिक्र किया है।
यह घटना भारत में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के एक खतरनाक ट्रेंड को उजागर करती है। ठग अब न केवल तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं, बल्कि सरकारी एजेंसियों की नकली पहचान बनाकर लोगों को मानसिक रूप से टारगेट कर रहे हैं।
साइबर क्राइम सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लोगों से अपील की है कि इस तरह की कॉल्स से सतर्क रहें। किसी भी अधिकारी से संपर्क हो तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें और किसी भी डर या दबाव में पैसा न भेजें।
यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि साइबर सुरक्षा अब एक जरूरी जागरूकता का विषय है, और सरकार को चाहिए कि वह डिजिटल अपराधों के प्रति सख्त कदम उठाए और आम जनता को लगातार जागरूक करती रहे।



