
बिहार चुनाव 2025 के प्रचार में इस बार एक बार फिर भोजपुरी गानों का जबरदस्त जलवा देखा जा रहा है। चुनावी मैदान में जैसे-जैसे राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता बढ़ रही है, वैसे-वैसे सोशल मीडिया और गांव-गांव के नुक्कड़ों पर भोजपुरी चुनावी गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन की ओर से ‘जोड़ी मोदी-नीतीश के हिट होई’ जैसे गाने खूब वायरल हो रहे हैं, जिनमें एक ओर विकास, सड़क, बिजली, रोजगार की बातों को गीतों के जरिए सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं विपक्ष की तरफ से ‘लालटेन पर बटन दबाई दिह ना’ जैसे गानों की धुन ग्रामीण क्षेत्रों में खासा लोकप्रिय हो रही है, जिसमें बदलाव, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोला जा रहा है। चुनावी गीतों का यह दौर नया नहीं है, पर इस बार डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत ने इन्हें पहले से ज्यादा प्रभावी बना दिया है।
भोजपुरी गाने हमेशा से बिहार की मिट्टी और भाषा की पहचान रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इनका राजनीतिक उपयोग तेजी से बढ़ा है। पार्टियां अब प्रोफेशनल गायकों, फिल्मी कलाकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद से ऐसे गाने बनवाती हैं जो जनता के दिल और दिमाग दोनों पर असर डालते हैं। इन गानों में कभी तंज, कभी व्यंग्य, तो कभी जोश भर देने वाली अपील होती है, जिससे मतदाता आसानी से जुड़ जाते हैं। गांवों में होने वाली चौपाल बैठकों से लेकर शहरी रैलियों तक, हर जगह चुनावी गानों का रंग दिख रहा है। विशेष रूप से युवा वोटरों पर इनका प्रभाव काफी गहरा देखा गया है, क्योंकि ये गाने आसानी से रील्स, शॉर्ट वीडियो और व्हाट्सऐप स्टेटस के जरिए फैल जाते हैं।
इस चुनाव में गानों की टक्कर सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है। एक ओर सत्ता पक्ष अपने कामों और विकास योजनाओं को संगीत में पिरोकर जनता तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार की कमियों को गीतों के जरिए उजागर कर रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहार चुनाव में राजनीतिक नारों से ज्यादा असर अब इन चुनावी भोजपुरी गीतों का दिख रहा है। आने वाले समय में मतदाता किस गाने की ताल पर मतदान करेंगे, यह तो परिणाम बताएंगे, लेकिन यह साफ है कि भोजपुरी संगीत इस चुनावी जंग का सबसे मजबूत हथियार साबित हो रहा है।



