
भारत की सैन्य नीति में “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद एक निर्णायक बदलाव देखा जा रहा है। इस ऑपरेशन ने न केवल भारत की रणनीतिक सोच को आधुनिक रूप दिया बल्कि आत्मनिर्भरता और सटीक युद्ध नीति की दिशा में भी एक मजबूत संदेश दिया। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीक, साइबर युद्धक क्षमता और रियल-टाइम इंटेलिजेंस का प्रयोग कर दिखाया कि अब देश किसी भी परिस्थिति में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। “ऑपरेशन सिंदूर” का मुख्य उद्देश्य सीमाओं पर शांति बनाए रखते हुए दुश्मन को रणनीतिक रूप से जवाब देना था, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख और भी मजबूत हुई।
इस अवसर पर भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी ने युवा पीढ़ी, खासकर Gen-Z, को एक विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में जानकारी तेजी से फैलती है, लेकिन हर खबर सही नहीं होती। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज से सावधान रहें और किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। कर्नल कुरैशी ने बताया कि फेक न्यूज सिर्फ जनमत को नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात जवानों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। जब युवा सच्ची जानकारी साझा करेंगे और गलत सूचनाओं का विरोध करेंगे, तब ही देश मजबूत बनेगा। कर्नल कुरैशी ने यह भी बताया कि नई पीढ़ी को डिजिटल जिम्मेदारी समझनी होगी, क्योंकि भविष्य के युद्ध केवल बंदूकों से नहीं, बल्कि जानकारी और तकनीक से लड़े जाएंगे।
“ऑपरेशन सिंदूर” ने यह साबित किया है कि भारत अब किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाला देश नहीं है। नई युद्ध नीति में प्रौद्योगिकी, रणनीतिक सटीकता और जनभागीदारी तीनों को बराबर महत्व दिया गया है। यह बदलाव आने वाले समय में भारत को न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में भी विश्व नेतृत्व की स्थिति में पहुंचा सकता है।



