यूपी में मिशन पोषण 2.0 की बड़ी सफलता, 98% बच्चों की मैपिंग; सुरक्षित प्रसव 99.97%

उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में चलाया जा रहा मिशन पोषण 2.0 अब ज़मीन पर असर दिखाने लगा है। सरकार की मॉनिटरिंग, आंगनबाड़ी नेटवर्क की सक्रिय भागीदारी और डिजिटल ट्रैकिंग की वजह से राज्य में 98 प्रतिशत से अधिक बच्चों की सफल मैपिंग कर ली गई है। इसका मतलब है कि अब अधिकांश बच्चों का पोषण स्तर, टीकाकरण, वजन और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत हस्तक्षेप किया जा सकता है। कुपोषण जैसी पुरानी चुनौती से निपटने में यह डेटा आधारित व्यवस्था बेहद अहम मानी जा रही है। यही नहीं, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। सुरक्षित प्रसव का आंकड़ा 99.97 प्रतिशत तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक बनी है और जागरूकता अभियानों का सकारात्मक परिणाम मिल रहा है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की नियमित फील्ड विजिट, पोषण ट्रैकिंग ऐप और समय पर चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता ने मिलकर इस बदलाव को संभव बनाया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इसी तरह निरंतर निगरानी और सामुदायिक भागीदारी बनी रही तो आने वाले वर्षों में कुपोषण और मातृ मृत्यु दर में और बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। मिशन पोषण 2.0 का यह प्रदर्शन न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि योजनाएं सही क्रियान्वयन के साथ कैसे ठोस परिणाम दे सकती हैं।



