पांच हफ्तों की लंबी प्रतीक्षा और तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के बाद आखिरकार ब्रिटिश फाइटर जेट F-35 केरल से अपने देश लौटने को तैयार हो गया है। यह अत्याधुनिक फाइटर जेट तकनीकी खराबी के कारण भारत के केरल राज्य में स्थित एक एयरबेस पर इमरजेंसी लैंडिंग करने को मजबूर हुआ था। तब से लेकर अब तक यह विमान वहीं खड़ा रहा और ब्रिटिश टेक्निकल टीम इसकी मरम्मत में जुटी रही। बताया जा रहा है कि इंजन से संबंधित एक संवेदनशील पार्ट में गड़बड़ी आने के कारण इसे उड़ान योग्य नहीं समझा गया था।
इस दौरान विमान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बरती और भारतीय वायुसेना की निगरानी में रखकर उसे किसी भी संवेदनशील जानकारी से दूर रखा गया। वहीं ब्रिटेन से आई इंजीनियरों की एक टीम ने भारत में रहकर इस हाईटेक जेट को दुरुस्त करने का कार्य पूरा किया। मरम्मत के लिए जरूरी पुर्जे भी ब्रिटेन से विशेष विमान द्वारा मंगवाए गए, जिसमें समय लग गया और जेट लगभग 35 दिनों तक केरल एयरबेस पर ही खड़ा रहा।
F-35 दुनिया के सबसे आधुनिक और महंगे फाइटर जेट्स में से एक है, जो स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, मल्टी-रोल कैपेबिलिटी और डिजिटल अवेयरनेस के लिए जाना जाता है। इसलिए भारत में इतनी लंबी अवधि तक इसका रुकना सुरक्षा और कूटनीतिक दोनों दृष्टियों से संवेदनशील मसला बन गया था।
अब मरम्मत पूरी होने और सभी उड़ान-पूर्व परीक्षण सफल होने के बाद विमान को वापस ब्रिटेन भेजने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसे भारतीय और ब्रिटिश दोनों वायुसेनाओं के अधिकारियों की मौजूदगी में क्लियरेंस दिया गया है।
यह घटना न केवल तकनीकी आपात स्थिति को दर्शाती है, बल्कि भारत की रक्षा तकनीकी सहायता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की भूमिका इस घटना में बेहद सहयोगात्मक रही, जिससे भविष्य में रक्षा मामलों में और भी मजबूत साझेदारी के संकेत मिलते हैं।



