
कनाडा सरकार ने हाल ही में अपने वीजा नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसने खास तौर पर भारतीय आवेदकों को प्रभावित किया है। इस नए वीजा प्लान के तहत कनाडा अब अस्थायी वीजा जैसे छात्र, वर्क परमिट और टूरिस्ट वीजा आवेदनों की सख्त जांच करेगा और जरूरत पड़ने पर एक साथ हजारों आवेदन रद्द कर सकता है। यह निर्णय कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) और बॉर्डर सर्विस एजेंसी (CBSA) द्वारा मिलकर लिया गया है, जिसका उद्देश्य “फर्जी दस्तावेज़ों” और “धोखाधड़ी वाले आवेदन” को रोकना बताया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा में हाल के वर्षों में भारतीय छात्रों और वर्क वीजा आवेदनों की संख्या में तेज़ी आई है, लेकिन इसके साथ फर्जीवाड़े के मामले भी बढ़े हैं। कई मामलों में एजेंटों द्वारा गलत दस्तावेज़ लगाकर छात्रों को भेजा गया, जिससे कनाडा की इमिग्रेशन नीति पर दबाव बढ़ गया। अब सरकार ने सख्ती दिखाते हुए तय किया है कि संदिग्ध मामलों में किसी भी समय वीजा रद्द किया जा सकता है, भले ही वह पहले से स्वीकृत क्यों न हो।
इस नीति के तहत विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नाइजीरिया और कुछ अन्य देशों को उच्च-जोखिम श्रेणी में रखा गया है। इसका सीधा असर भारतीय छात्रों और कामगारों पर पड़ने वाला है, जो कनाडा में शिक्षा या रोजगार का सपना देखते हैं। बताया जा रहा है कि 2025 में अब तक भारतीय छात्रों के करीब 80% वीजा आवेदन अस्वीकृत किए जा चुके हैं, जो पिछले सालों की तुलना में काफी अधिक है।
कनाडा सरकार का दावा है कि यह कदम देश की सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए है, लेकिन भारतीय समुदाय और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ईमानदार आवेदकों को भी नुकसान हो रहा है। बहुत से छात्र, जिन्होंने वैध दस्तावेज़ों के साथ आवेदन किया था, अब अस्वीकृति का सामना कर रहे हैं।
यह नया वीजा प्लान उन भारतीयों के लिए चेतावनी है जो कनाडा में पढ़ाई या नौकरी करने की तैयारी कर रहे हैं। अब आवेदकों को अपने सभी दस्तावेज़ प्रमाणिक रखना, वित्तीय स्थिति स्पष्ट दिखाना और अधिक पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी होगी। कनाडा की यह नई नीति दिखाती है कि अब विदेशी छात्रों और कामगारों के लिए वहां प्रवेश पाना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है।



