
अमेरिका द्वारा कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दिए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस धमकी का असर साफ तौर पर कनाडा के प्रधानमंत्री के रुख में देखने को मिला, जो पहले अमेरिका की व्यापारिक नीतियों की आलोचना कर रहे थे, लेकिन अब उनके सुर नरम पड़ते नजर आए। हालिया बयान में कनाडाई प्रधानमंत्री ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक “मजबूत और प्रभावशाली नेता” बताते हुए कहा कि अमेरिका की आर्थिक और राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। दरअसल, ट्रंप ने चुनावी मंच से यह संकेत दिया था कि यदि अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचा तो कनाडा से आने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस बयान के बाद कनाडा के उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों में चिंता की लहर दौड़ गई, क्योंकि दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है और टैरिफ बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। कनाडा की बड़ी आबादी और उद्योग अमेरिका पर निर्भर हैं, ऐसे में टैरिफ युद्ध की स्थिति रोजगार, निर्यात और निवेश तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसी दबाव के बीच प्रधानमंत्री का नरम बयान सामने आया, जिसे कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और संवाद के रास्ते पर चलना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि संभावित आर्थिक संकट से बचने की रणनीति है। ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति पहले भी कई देशों को झुकने पर मजबूर कर चुकी है और कनाडा इस खतरे को अच्छी तरह समझता है। हालांकि, विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें राष्ट्रीय हितों की रक्षा में और सख्त रुख अपनाना चाहिए। कुल मिलाकर, अमेरिका की टैरिफ धमकी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में आर्थिक ताकत किस तरह देशों के फैसलों और बयानों को प्रभावित करती है, और आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कनाडा-अमेरिका संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।



