
दिल्ली आज क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक सहयोग के मामले में एक महत्वपूर्ण मंच बनने जा रही है, जहां कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (Colombo Security Conclave) के सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) एक अहम बैठक में हिस्सा लेने के लिए एकत्र हो रहे हैं। भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल इस उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी करेंगे। इस सम्मेलन में श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स और बांग्लादेश जैसे देशों के सुरक्षा प्रमुख शामिल होने की संभावना है। कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी अभियान, साइबर सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने, नई सुरक्षा चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति तैयार करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर चर्चा करना है। हाल के वर्षों में समुद्री सीमाओं पर बढ़ते खतरे, ड्रग ट्रैफिकिंग, मानव तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और साइबर अपराधों में वृद्धि ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में यह सम्मेलन सदस्य देशों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहां वे अपने-अपने अनुभव साझा कर सकें और सामूहिक कार्ययोजना तैयार कर सकें।
भारत ने हमेशा से ‘सुरक्षा और विकास सभी के लिए’ (SAGAR) के सिद्धांत पर जोर दिया है, और यह सम्मेलन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अजीत डोभाल के नेतृत्व में भारत न सिर्फ इस क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी को मजबूत कर रहा है बल्कि एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका भी स्थापित कर रहा है। बैठक के दौरान आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त अभियान, समुद्री सुरक्षा पर संयुक्त गश्त, सूचना साझा करने की प्रणाली, और आपदा प्रबंधन के लिए सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच देशों को मजबूत और लचीला सुरक्षा नेटवर्क की आवश्यकता है। इसलिए दिल्ली में आयोजित यह NSA बैठक आने वाले समय में पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा संरचना को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



