
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली के दौरान दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच 2021 में हुए सीजफायर समझौते में अहम भूमिका निभाई थी। ट्रंप ने कहा कि अगर वे न होते, तो शायद दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बन जाती। उनके इस बयान पर भारत सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर दोनों देशों के बीच आपसी बातचीत और समझ से हुआ था, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी विदेश नीति में हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता और संप्रभुता का पालन करता है। ट्रंप का यह बयान एक बार फिर से उनके पुराने बयानों की तरह विवादों में घिर गया है, जिसमें वे अक्सर खुद को अंतरराष्ट्रीय मामलों का नायक बताते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का यह दावा ऐसे समय में आया है जब वे एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। वे अक्सर अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनी भूमिका को प्रमुख बताते हैं। भारत-पाक जैसे संवेदनशील मुद्दे पर ट्रंप का यह बयान न केवल चौंकाने वाला था बल्कि कई सवाल भी खड़े करता है। 2021 में जो सीजफायर हुआ था, वह दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत और सहमति से हुआ था।
भारत सरकार ने ट्रंप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि “भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाए जाते हैं। हमारी विदेश नीति में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होती।” यह भारत का लंबे समय से स्पष्ट और मजबूत रुख रहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मसले पर उसकी रणनीति स्वतंत्र और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होती है।



