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2 डिग्री ग्लोबल वॉर्मिंग का खतरा: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता, भारत में बढ़ेगी भीषण गर्मी

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ी एक नई वैज्ञानिक चेतावनी ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं के मुताबिक अगर वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है, तो दुनिया की लगभग आधी आबादी को जानलेवा गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। इस अध्ययन में बताया गया है कि बढ़ता तापमान केवल मौसम में बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सीधे इंसानी जीवन, स्वास्थ्य, कृषि और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डालेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि हीटवेव की अवधि लंबी होगी और तापमान ऐसे स्तर तक पहुंचेगा, जहां शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाएगा। खास तौर पर भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों के लिए यह खतरा और भी गंभीर है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत में गर्मी के दिनों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और कई शहरों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच सकता है। उत्तर भारत, मध्य भारत और तटीय इलाकों में उमस और तापमान का घातक मेल देखने को मिलेगा, जिससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हृदय संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में हालात और खराब हो सकते हैं, क्योंकि वहां ठंडक के संसाधन सीमित हैं और लोग खुले में काम करने को मजबूर हैं। कृषि पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा, फसलों की पैदावार घटेगी और पानी की कमी गहराएगी।

ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने चेताया है कि अगर अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। कार्बन उत्सर्जन में कटौती, नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल, हरित क्षेत्रों का विस्तार और टिकाऊ जीवनशैली अपनाना अब विकल्प नहीं बल्कि मजबूरी बन चुका है। भारत के संदर्भ में शहरी नियोजन, हीट एक्शन प्लान और जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार, उद्योग और आम नागरिक मिलकर अगर समय रहते कदम उठाएं, तो इस संकट की तीव्रता को कम किया जा सकता है। 2 डिग्री तापमान वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के लिए चेतावनी की घंटी है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य को खतरे में डाल सकता है।

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