
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब केवल जंग के मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव आधुनिक तकनीक और वैश्विक परिवहन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर GPS सिग्नल जाम होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे जहाजों और विमानों की लोकेशन सिस्टम प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध की स्थिति में कई बार देशों द्वारा जानबूझकर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके तहत दुश्मन की नेविगेशन और संचार प्रणाली को बाधित करने के लिए GPS सिग्नल को जाम या स्पूफ किया जाता है। इसी वजह से मिडिल ईस्ट के कई हिस्सों में जहाजों की वास्तविक लोकेशन और उनके ट्रैकिंग डेटा में अंतर देखा जा रहा है। कुछ मामलों में जहाजों की लोकेशन समुद्र के बीच से हटकर जमीन पर या पूरी तरह अलग स्थान पर दिखाई दे रही है, जिससे समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों की चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स को भी अपनी उड़ान के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है, क्योंकि GPS आधारित नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी पायलटों के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि आधुनिक विमानों में बैकअप नेविगेशन सिस्टम मौजूद होते हैं, फिर भी लगातार GPS जामिंग की स्थिति एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इलेक्ट्रॉनिक जंग का हिस्सा हो सकता है, जहां बिना सीधे हमला किए तकनीकी साधनों से विरोधी पक्ष की गतिविधियों को प्रभावित किया जाता है। मिडिल ईस्ट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री और हवाई मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन सैकड़ों जहाज और हजारों विमान गुजरते हैं। ऐसे में अगर GPS सिस्टम लगातार प्रभावित होता रहा तो इसका असर वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल कई देशों की समुद्री और विमानन एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वैकल्पिक नेविगेशन सिस्टम के उपयोग पर जोर दे रही हैं, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।



