कागजी खानापूर्ति खत्म! ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत छात्रों के स्किल और जॉब ट्रैकिंग पर फोकस

उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ को लेकर अब सख्त रुख अपनाया है। पहले जहां यह योजना केवल कागजों तक सीमित रह जाने के आरोपों में घिरी रहती थी, वहीं अब सरकार ने इसे पूरी तरह प्रभावी और परिणाम आधारित बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संबंधित विभागों को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि सिर्फ प्रशिक्षण देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशिक्षित छात्र वास्तव में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं या नहीं।
‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत छात्रों को विभिन्न व्यावसायिक कौशलों में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे नौकरी के लिए तैयार हो सकें या खुद का रोजगार शुरू कर सकें। लेकिन अब तक इस योजना में सबसे बड़ी कमी यह रही कि प्रशिक्षण के बाद छात्रों की स्थिति पर कोई ठोस निगरानी नहीं होती थी। इसी खामी को दूर करने के लिए सरकार अब डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने जा रही है, जिसके जरिए हर छात्र की प्रगति और रोजगार की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जाएगा।
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी प्रशिक्षण संस्थानों को अपने छात्रों का डेटा नियमित रूप से अपडेट करना होगा। इसमें यह जानकारी भी शामिल होगी कि छात्र ने किस क्षेत्र में प्रशिक्षण लिया, उसे नौकरी मिली या नहीं, और अगर मिली तो किस वेतन पर। इससे न केवल योजना की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि इसकी सफलता का सही आकलन भी किया जा सकेगा।
इसके अलावा, अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा रही है। यदि किसी जिले में प्रशिक्षण के बावजूद रोजगार के आंकड़े संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस सख्ती से योजना का वास्तविक लाभ युवाओं तक पहुंचेगा और प्रदेश में बेरोजगारी कम करने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ को अब एक नई दिशा दी जा रही है, जहां केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम देने पर जोर होगा। यह कदम प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



