देश के एक नामी फर्टिलिटी सेंटर में ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसने न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि उन हजारों दंपतियों की भावनाओं को भी झकझोर दिया है जो संतान प्राप्ति की उम्मीद से ऐसे केंद्रों की ओर रुख करते हैं। हाल ही में एक दंपती ने जब फर्टिलिटी सेंटर की मदद से बच्चे को जन्म देने के बाद उसका DNA टेस्ट कराया, तो रिपोर्ट देखकर उनके होश उड़ गए। बच्चा जैविक रूप से उनसे जुड़ा ही नहीं था।
यह मामला तब सामने आया जब बच्चे की कुछ शारीरिक विशेषताएं मां-बाप से मेल नहीं खा रही थीं। संदेह के चलते जब DNA परीक्षण कराया गया, तो साफ हुआ कि बच्चे का न तो पिता से और न ही मां से कोई जैविक संबंध है। इस खुलासे के बाद दंपती ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
जांच में पता चला कि यह कोई एकल मामला नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह द्वारा चलाई जा रही फर्टिलिटी क्लिनिक की आड़ में बच्चा बदलने या गलत शुक्राणु/डिंबाणु के प्रयोग की गहरी साजिश है। पुलिस ने छापेमारी करते हुए फर्टिलिटी सेंटर के 10 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक वरिष्ठ डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन, और दलाल भी शामिल हैं।
प्राथमिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह मोटी रकम लेकर कुछ मामलों में दूसरे दंपतियों के भ्रूण का प्रयोग करता था, या फिर किसी अनजान डोनर की जानकारी बिना बताए इस्तेमाल की जाती थी। इसके पीछे उद्देश्य या तो मेडिकल लापरवाही को छिपाना होता था, या जानबूझकर “सफलता” दिखाने के लिए आंकड़ों से खिलवाड़ करना।
इस पूरे मामले ने IVF और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट पर भरोसा करने वाले हजारों परिवारों के मन में डर पैदा कर दिया है। कई अन्य दंपतियों ने भी अब अपने बच्चों के डीएनए टेस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित केंद्र की लाइसेंसिंग और संचालन को लेकर जांच के आदेश दिए हैं।
यह मामला सिर्फ चिकित्सा धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि एक नैतिक अपराध भी है, जहां माता-पिता की भावनाओं, उम्मीदों और विश्वास के साथ खुला खिलवाड़ किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए IVF प्रक्रिया में पारदर्शिता, निगरानी और रेगुलेशन बेहद जरूरी है।
अब यह देखना बाकी है कि इस मामले में और कितने खुलासे होते हैं और क्या देश में फर्टिलिटी क्लिनिक की प्रणाली में कोई बड़ा सुधार लाया जाएगा। लेकिन फिलहाल, यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि चिकित्सा सेवाओं में भरोसा कायम रखने के लिए सख्त निगरानी और कानून की सख्ती जरूरी है।



