
बजट सत्र को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद सदस्यों को एक अहम संदेश देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी सांसद इस सत्र को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ लेंगे। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि बजट सत्र केवल औपचारिकता निभाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा, विकास की प्राथमिकताओं और आम जनता के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंदिर है और यहां होने वाली चर्चाएं देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती हैं, इसलिए हर सांसद का दायित्व है कि वह सकारात्मक, तथ्यपरक और सार्थक योगदान दे।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से यह सलाह दी कि बजट सत्र के दौरान राजनीतिक मतभेदों को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रखते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार बजट के माध्यम से गरीब, किसान, युवा, महिलाएं और मध्यम वर्ग सभी के हितों को ध्यान में रखकर योजनाएं प्रस्तुत करती है, ऐसे में सांसदों की भूमिका और भी बढ़ जाती है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि सभी दलों के सांसद बिना अनावश्यक व्यवधान के बजट प्रस्तावों पर गहन चर्चा करेंगे, सुझाव देंगे और जहां सुधार की जरूरत हो, वहां रचनात्मक आलोचना भी करेंगे।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि संसद में होने वाली बहसें केवल सरकार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उनका संदेश पूरे देश में जाता है। जब संसद में सकारात्मक माहौल बनता है, तो देश में भी भरोसा और स्थिरता का वातावरण पैदा होता है। उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं, जनता की अपेक्षाओं और विकास से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सदन में रखें, ताकि बजट वास्तव में समावेशी और जनोन्मुखी बन सके।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने यह संकेत भी दिया कि सरकार विपक्ष की भूमिका का सम्मान करती है और चाहती है कि विपक्ष भी अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए सार्थक सहयोग करे। उनका मानना है कि स्वस्थ बहस से ही बेहतर नीतियां बनती हैं। अंत में पीएम मोदी ने दोहराया कि बजट सत्र देश के भविष्य की नींव रखने वाला सत्र है और उन्हें पूरा विश्वास है कि सभी सांसद इसे गंभीरता से लेते हुए लोकतंत्र को मजबूत करेंगे।



