
ईरान में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं को देखते हुए भारत सरकार ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने तेल और गैस से जुड़ी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि देश में गैस की उपलब्धता पर किसी तरह का असर न पड़े। अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक हालात को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति प्रभावित होती है तो भी देश के उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है।
ईरान में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल विपणन कंपनियों और रिफाइनरियों को सतर्क रहने और एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि देश में घरेलू गैस की सप्लाई किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो, इसलिए पहले से ही भंडारण और उत्पादन दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय ने कंपनियों से कहा है कि वे रिफाइनरियों की क्षमता का पूरा उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उत्पादन की व्यवस्था भी रखें। इसके साथ ही गैस के रणनीतिक भंडार को मजबूत करने और आयात विकल्पों पर भी नजर रखी जा रही है। इससे किसी भी आपात स्थिति में देश में एलपीजी की आपूर्ति को बनाए रखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य यही है कि आम लोगों को रसोई गैस की कमी या कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का सामना न करना पड़े।



