
भारत और इजरायल के बीच रिश्तों को अब ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा मिल गया है, जो दोनों देशों के संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कदम के तहत कुल 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनमें रक्षा सहयोग, साइबर सुरक्षा, कृषि नवाचार, जल प्रबंधन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और अंतरिक्ष तकनीक जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। यह साझेदारी केवल औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि साझा हितों और समान रणनीतिक दृष्टिकोण का प्रतीक है। बीते वर्षों में भारत और इजरायल के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, खासकर रक्षा और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में। इजरायल भारत के प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में से एक रहा है और अत्याधुनिक ड्रोन, मिसाइल सिस्टम तथा निगरानी तकनीकों में दोनों देशों के बीच गहरा तालमेल बना है। अब ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा मिलने से संयुक्त अनुसंधान, सह-उत्पादन और तकनीकी हस्तांतरण को और गति मिलेगी। कृषि क्षेत्र में इजरायल की उन्नत तकनीक, जैसे ड्रिप इरिगेशन और जल संरक्षण मॉडल, भारतीय किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। नए समझौतों के तहत कई उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे उत्पादकता बढ़ाने और जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी। साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग से डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्टार्टअप्स को वैश्विक अवसर मिल सकेंगे। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देश कई मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं, जिससे कूटनीतिक संबंधों में स्थिरता आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी पश्चिम एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति को और सुदृढ़ करेगी तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग के नए द्वार खोलेगी। कुल मिलाकर, 17 समझौतों के साथ ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा भारत-इजरायल संबंधों को नई दिशा, नई ऊर्जा और दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा।



