बिजलीकर्मियों के आवास पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का विरोध, मार्च-अप्रैल में आंदोलन की चेतावनी

राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है, लेकिन अब यह कदम विवादों में घिरता नजर आ रहा है। बिजली विभाग के कर्मचारियों के आवासों पर भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जिसके विरोध में कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां उन्हें पोस्टपेड व्यवस्था के तहत बिल भुगतान की सुविधा मिलती थी, वहीं अब प्रीपेड सिस्टम लागू होने से उन्हें अग्रिम भुगतान करना पड़ेगा, जो आर्थिक रूप से अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि बिना व्यापक संवाद और सहमति के इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि विभागीय कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती की जा रही है और यह फैसला उनके हितों के खिलाफ है। इसी मुद्दे को लेकर मार्च और अप्रैल महीने में चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई गई है, जिसमें धरना, प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि स्मार्ट मीटर की तकनीकी खामियों और रिचार्ज संबंधी दिक्कतों का समाधान पहले सुनिश्चित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर विभाग का तर्क है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर से पारदर्शिता बढ़ेगी, बिजली चोरी पर अंकुश लगेगा और उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है और यदि समय रहते समाधान नहीं निकला तो आने वाले महीनों में यह मुद्दा बड़ा रूप ले सकता है।



