
भारत और ब्रिटेन के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर डाटा सुरक्षा एक अहम मुद्दा बनकर उभरी है। राज्यसभा में इस विषय पर बोलते हुए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने साफ कहा कि भारत अपने नागरिकों और कारोबार से जुड़े डाटा के संरक्षण को लेकर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते की वार्ताओं में डाटा से जुड़े प्रावधानों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
जितिन प्रसाद ने सदन को जानकारी दी कि भारत सरकार का स्पष्ट रुख है कि डाटा देश की एक अहम संपत्ति है और उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में डाटा का दुरुपयोग किसी भी देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की निजता के लिए खतरा बन सकता है। इसी कारण भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते में ऐसे प्रावधानों को स्वीकार नहीं करेगा, जो देश के कानूनों या संप्रभुता से समझौता करते हों।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के कारोबार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देना है, लेकिन यह सब राष्ट्रीय हितों के दायरे में रहकर ही किया जाएगा। डाटा लोकलाइजेशन, साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता गोपनीयता जैसे मुद्दों पर भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। भारत चाहता है कि देश में उत्पन्न डाटा का इस्तेमाल भारतीय कानूनों के अनुरूप हो और उसकी प्रोसेसिंग को लेकर पारदर्शिता बनी रहे।
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार व्यापार वृद्धि और तकनीकी सहयोग के पक्ष में है, लेकिन डाटा का अनियंत्रित प्रवाह भविष्य में गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकता है। इसलिए भारत-ब्रिटेन FTA में डाटा से जुड़े अध्याय पर विस्तृत चर्चा हो रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत पहले ही डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट जैसे कानूनों के जरिए डाटा सुरक्षा के मजबूत ढांचे की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को इन घरेलू कानूनों के अनुरूप ही तैयार किया जाएगा।
कुल मिलाकर, राज्यसभा में दिए गए बयान से यह साफ हो गया कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते में आर्थिक फायदे जितने अहम हैं, उतनी ही महत्वपूर्ण डाटा सुरक्षा भी है। भारत सरकार इस संतुलन को बनाए रखते हुए ही किसी अंतिम समझौते पर सहमति देगी।



