ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के सबसे बड़े बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों में से एक टैलिसमैन सेबर 2025 का आगाज़ हो चुका है, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अन्य मित्र देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इस बार भारत की भागीदारी न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की वैश्विक सैन्य ताकत और सहयोग की भावना का भी प्रदर्शन करती है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य Indo-Pacific क्षेत्र में सहयोग, तैयारियों और संयुक्त संचालन क्षमता को मजबूत करना है।
भारत की उपस्थिति ने चीन की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह अभ्यास उस क्षेत्र में हो रहा है जिसे चीन अपनी रणनीतिक पहुंच के तहत देखता है। टैलिसमैन सेबर का आयोजन हर दो साल में होता है और यह किसी भी संभावित आपदा या संघर्ष की स्थिति में संयुक्त सैन्य कार्रवाई की तैयारी का संकेत देता है। इस अभ्यास के ज़रिए भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा साझेदारियों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
इस सैन्य अभ्यास के दौरान जमीनी, समुद्री और हवाई अभियानों की जटिल रणनीतियाँ अभ्यास की जाएंगी, जिससे सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा। यह आयोजन भारत की रक्षा नीति के विस्तार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। चीन के लिए यह संकेत है कि क्षेत्रीय देशों का एकजुट होकर सैन्य साझेदारी करना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी है।
भारत की इस सैन्य अभ्यास में भागीदारी सिर्फ एक सैन्य प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका का संकेत भी है। भारत अब एक क्षेत्रीय शक्ति से बढ़कर वैश्विक सैन्य गठबंधनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। टैलिसमैन सेबर 2025 में भारत की भागीदारी यह दिखाती है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ खड़ा है।
इस अभ्यास के दौरान सेना, नौसेना और वायुसेना की एकीकृत रणनीतियों को भी परखा जाएगा। इसमें युद्धाभ्यास, युद्ध-सिमुलेशन, सामरिक संचार, और आपातकालीन परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई जैसे आयामों पर फोकस किया जाएगा। भारत की तीनों सेनाओं के प्रतिनिधि इसमें भाग ले रहे हैं, जिससे उसकी समग्र सैन्य क्षमता और बहुपक्षीय अभ्यासों में अनुभव बढ़ेगा।
टैलिसमैन सेबर जैसे अभ्यास न केवल सैन्य स्तर पर बल्कि राजनयिक और भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देश ‘QUAD’ के तहत पहले से ही एक साझा रणनीतिक ढांचा तैयार कर रहे हैं और यह अभ्यास उसी सहयोग की व्यवहारिक झलक देता है। भारत की इस उपस्थिति को चीन नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता, खासकर ऐसे समय में जब वह दक्षिण चीन सागर में अपनी सैन्य उपस्थिति लगातार बढ़ा रहा है।
चीन की मीडिया और सरकारी बयानबाज़ी में इस अभ्यास को लेकर पहले ही नाराज़गी दिखाई दी है। चीनी विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते सामरिक संबंधों का संकेत है, जो भविष्य में चीन की रणनीतिक चुनौतियों को बढ़ा सकता है।
इसके अलावा, भारत की यह भागीदारी उसकी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और ‘सागर’ (Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण का भी एक हिस्सा है, जिसमें वह इंडो-पैसिफिक को स्वतंत्र, खुला और संतुलित बनाए रखने का पक्षधर है।



