
मध्य पूर्व में संयुक्त सैन्य अभ्यास के दौरान हुई एक बड़ी घटना ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में हलचल मचा दी। अमेरिका और कुवैत के बीच चल रहे ‘टॉप गन-2’ नामक हवाई युद्धाभ्यास में कथित तौर पर अमेरिका के तीन फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गए। यह अभ्यास Kuwait और United States की वायु सेनाओं के बीच तालमेल और कॉम्बैट तैयारियों को परखने के लिए आयोजित किया गया था। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना तकनीकी खराबी, संचार में चूक और समन्वय की कमी का मिश्रित परिणाम हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि अभ्यास के दौरान एयर-टू-एयर कॉम्बैट सिमुलेशन किया जा रहा था, जिसमें हाई-स्पीड मैन्युवर और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी जटिल परिस्थितियां शामिल थीं। ऐसे अभ्यासों में पायलटों को वास्तविक युद्ध जैसी स्थिति में निर्णय लेने होते हैं। बताया जा रहा है कि एक अहम मोड़ पर फ्रेंडली फायर अलर्ट सिस्टम ने सही समय पर प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। हालांकि आधिकारिक तौर पर ‘फ्रेंडली फायर’ की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जांच इसी एंगल से भी की जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, संयुक्त अभ्यासों में अलग-अलग देशों की कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल, रडार फ्रीक्वेंसी और एंगेजमेंट रूल्स में सूक्ष्म अंतर होते हैं। यदि इनका पूर्व समन्वय शत-प्रतिशत न हो तो जोखिम बढ़ जाता है। कुवैत की वायु सेना हाल के वर्षों में आधुनिक तकनीक से लैस हुई है, लेकिन अमेरिकी सिस्टम के साथ पूर्ण इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करना एक जटिल प्रक्रिया है।
घटना के बाद दोनों देशों ने संयुक्त जांच समिति गठित की है। पायलटों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू किया गया और अधिकांश क्रू को सुरक्षित निकाल लिया गया। इस हादसे ने यह जरूर साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक के बावजूद मानव त्रुटि और सिस्टम इंटीग्रेशन की चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना भविष्य के सैन्य अभ्यासों के लिए सबक साबित होगी। अमेरिका और कुवैत दोनों के लिए यह जरूरी है कि वे डेटा-शेयरिंग, रियल-टाइम कम्युनिकेशन और फ्रेंड-ऑर-फो सिस्टम को और मजबूत करें। ‘टॉप गन-2’ जैसे अभ्यास जहां रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हैं, वहीं ऐसी घटनाएं यह भी याद दिलाती हैं कि युद्धाभ्यास में एक छोटी सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।



