
भारत के दक्षिणी राज्य केरल का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ कर दिया गया है। यह ऐतिहासिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया, जो कि नई सेवातीर्थ नीति के तहत हुआ। सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य का यह नया नाम न केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है, बल्कि स्थानीय भाषा और परंपराओं के प्रति सम्मान भी जताता है।
केरलम नामकरण का फैसला राज्यवासियों और साहित्यिक समुदाय दोनों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया लेकर आया है। भाषाविदों का कहना है कि ‘केरलम’ शब्द प्राचीन तमिल-कुड़ालिक शैली से लिया गया है और इसका उपयोग ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी मिलता है। इस बदलाव से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलेगी और पर्यटन के क्षेत्र में भी यह एक नया आकर्षण बन सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि केरलम का नामकरण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह देश की विविधताओं और उसकी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा का प्रतीक है। मोदी कैबिनेट ने यह निर्णय सेवातीर्थ नीति के अंतर्गत लिया, जिसका उद्देश्य राज्यों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को प्रोत्साहित करना है। नीति के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम में बदलाव की प्रक्रिया को और सुगम बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केरलम नाम न केवल राज्यवासियों में गर्व की भावना जगाएगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राज्य की पहचान को स्पष्ट करेगा। राज्य सरकार ने इसके लिए एक विशेष कार्यक्रम की घोषणा की है, जिसमें नए नाम का उपयोग सरकारी दस्तावेज़ों, संकेतों, वेबसाइटों और शैक्षणिक संस्थानों में शुरू किया जाएगा।
सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य से देखा जाए तो यह कदम राज्यों की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई विविधता को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस निर्णय के साथ ही केरलम राज्य अब एक नई पहचान के साथ देश और दुनिया के सामने आएगा।
इस ऐतिहासिक निर्णय से राज्य में पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और प्रशासनिक क्षेत्रों में नई ऊर्जा और उत्साह पैदा होने की उम्मीद है। नागरिकों ने इस बदलाव को एक गर्व का विषय बताया और कहा कि यह कदम उनकी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति सम्मान को दर्शाता है।



