
मिडिल ईस्ट में बढ़ते ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर किसी तरह की घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार के अनुसार, भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति अपनाई है और इसी का परिणाम है कि संकट के समय भी सप्लाई चेन मजबूत बनी हुई है। खासतौर पर Russia ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए निरंतर कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग काफी मजबूत हुआ है, जिससे वैश्विक अस्थिरता के बावजूद घरेलू बाजार स्थिर बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की अहम भूमिका रही है। हालांकि Iran और Israel के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर पैदा किया है, लेकिन सरकार का कहना है कि भारत ने पहले से वैकल्पिक इंतजाम कर रखे हैं। रूसी कच्चा तेल रियायती दरों पर मिलने से भारत को आर्थिक रूप से भी फायदा हो रहा है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर अनावश्यक दबाव नहीं बन रहा। अधिकारियों के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति के विकल्प भी खुले हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘मल्टी-सोर्स इंपोर्ट पॉलिसी’ मौजूदा हालात में कारगर साबित हो रही है। अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल खरीद के विकल्प सक्रिय हैं। केंद्र सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग किया जा सकता है। फिलहाल सरकार का जोर कीमतों को नियंत्रित रखने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने पर है। कुल मिलाकर, ईरान-इजरायल युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर मजबूत स्थिति का दावा किया है और रूस के सहयोग से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सुचारु बनाए रखने का भरोसा जताया है।



