
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत जल्द ही अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के दौरे पर जाने वाले हैं। इस दौरे का मुख्य आकर्षण महान स्वतंत्रता सेनानी वीर विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण होगा। ऐतिहासिक सेल्यूलर जेल से जुड़ा अंडमान सावरकर के जीवन और बलिदान का साक्षी रहा है, ऐसे में यह कार्यक्रम राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है।
जानकारी के अनुसार, मोहन भागवत अपने अंडमान प्रवास के दौरान विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे। वीर सावरकर ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष अंडमान की काला पानी जेल में बिताए थे, जहां उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहकर भी देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए संघर्ष जारी रखा। उनकी प्रतिमा का अनावरण उसी संघर्ष और त्याग को स्मरण कराने का एक प्रयास माना जा रहा है।
RSS से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल एक मूर्ति अनावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संग्राम का वास्तविक इतिहास जानने और उससे प्रेरणा लेने का संदेश दिया जाएगा। मोहन भागवत इस अवसर पर सावरकर के विचारों, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता पर भी अपने विचार रख सकते हैं।
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह का स्वतंत्रता संग्राम में विशेष स्थान रहा है। सेल्यूलर जेल में सैकड़ों क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपने जीवन की आहुति दी। सावरकर की प्रतिमा का स्थापित होना उन सभी गुमनाम नायकों को भी श्रद्धांजलि देने जैसा है, जिनकी कहानियां इतिहास के पन्नों में कहीं खो गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन से अंडमान का ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व भी और अधिक बढ़ेगा। साथ ही, यह कार्यक्रम देशभर में सावरकर को लेकर जारी विमर्श को एक नई दिशा दे सकता है। मोहन भागवत का यह दौरा न केवल वैचारिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है, बल्कि राष्ट्र की स्मृति में स्वतंत्रता संग्राम के अध्यायों को और सशक्त करने वाला कदम भी साबित हो सकता है।



