
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके प्रशासन पर तीखा तंज कसा है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में कभी इतने “डरे हुए अधिकारी” नहीं देखे, जितने शी जिनपिंग के आसपास हैं। ट्रंप ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “मेरी कैबिनेट में भी लोग मेरे फैसलों से डरते थे, लेकिन चीन में तो हर व्यक्ति ऐसा लगता है जैसे बिना आदेश के सांस भी नहीं ले सकता।”
ट्रंप का यह बयान एक इंटरव्यू के दौरान तब आया जब उनसे पूछा गया कि वे चीन के नेतृत्व और उसकी नीतियों को कैसे देखते हैं। उन्होंने कहा, “शी जिनपिंग एक बहुत मजबूत नेता हैं, लेकिन उनके आस-पास के लोग उनकी छाया से भी डरते हैं। मैंने कभी किसी देश में इतनी भय की राजनीति नहीं देखी।” ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका में नेता की आलोचना की जा सकती है, बहस की जा सकती है, लेकिन चीन में ऐसा संभव नहीं है।
ट्रंप ने चीन की शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां के अधिकारी केवल आदेशों का पालन करते हैं, वहां स्वतंत्र सोच या असहमति की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि “शी जिनपिंग को छोड़कर कोई भी अपनी राय व्यक्त करने की हिम्मत नहीं रखता, यह स्थिति किसी भी आधुनिक लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।”
पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी तुलना करते हुए कहा, “जब मैं राष्ट्रपति था, मेरी कैबिनेट में कई बार लोग मुझसे असहमत होते थे, लेकिन यह एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है। चीन में अगर कोई अधिकारी असहमत होता है, तो शायद अगले दिन वह पद पर न रहे।”
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान न केवल चीन पर उनकी पुरानी कठोर नीति को दोहराता है बल्कि 2026 के अमेरिकी चुनावों के लिए उनकी रणनीति का भी हिस्सा है। ट्रंप लंबे समय से चीन के प्रति कड़ा रुख अपनाने की वकालत करते रहे हैं — चाहे वह व्यापार युद्ध हो, तकनीकी प्रतिबंध हों या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन की नीतियों का विरोध।
ट्रंप के इस तंज ने एक बार फिर अमेरिका-चीन रिश्तों में तल्खी बढ़ा दी है। हालांकि बीजिंग ने अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयानों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है।



