
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में एक बेहद खतरनाक आतंकी साजिश का खुलासा किया है, जिसमें एक डॉक्टर का नाम सामने आया है जो न केवल राइसिन जैसे घातक जहर बनाने में शामिल था, बल्कि ड्रोन के माध्यम से हथियार मंगाने और ISKP (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) से सीधे संपर्क में रहने जैसी गंभीर गतिविधियों में भी लिप्त पाया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी डॉक्टर पाकिस्तान के हैंडलरों के संपर्क में था, जो उसे भारत में आतंकी मॉड्यूल खड़ा करने के लिए निर्देश दे रहे थे। यह खुलासा देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली गंभीर गतिविधियों की ओर इशारा करता है।
एजेंसियों को जांच में पता चला कि यह डॉक्टर लंबे समय से रसायन विज्ञान और जैविक पदार्थों पर अनुसंधान कर रहा था। इसी तकनीकी जानकारी का उपयोग कर वह राइसिन नामक बेहद जहरीला टॉक्सिन तैयार कर रहा था, जो कुछ ही मात्रा में मनुष्य को मौत के मुंह में धकेल सकता है। राइसिन का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई जैविक आतंकवादी घटनाओं में किया जा चुका है और यह बेहद खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे में भारत में इस जहर के निर्माण की कोशिश बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि डॉक्टर ने ड्रोन की मदद से सीमा पार से हथियार मंगाने की योजना बनाई थी। पाकिस्तान से जुड़े ISKP नेटवर्क के सदस्य उसे लगातार फोन कॉल और एन्क्रिप्टेड मैसेजों के जरिए निर्देश दे रहे थे। फोन कॉल रिकॉर्डिंग और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पता चला कि वह भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए एक बड़े मॉड्यूल को सक्रिय करना चाहता था।
एजेंसियों का मानना है कि डॉक्टर का पाकिस्तान स्थित ISKP मॉड्यूल से संपर्क केवल हथियारों तक सीमित नहीं था। उसे भारत में संवेदनशील स्थानों की निगरानी, युवाओं की ब्रेनवॉशिंग और आतंकवादी विचारधारा फैलाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। उसकी गिरफ्तारी के बाद कई संदिग्ध चैट, कॉल इंटरसेप्ट और डिजिटल दस्तावेज़ बरामद हुए हैं, जिनसे आतंकी नेटवर्क की गहराई का पता चलता है।
इस पूरे मामले ने साबित कर दिया कि आतंकवादी संगठन अब अत्याधुनिक तकनीक, ड्रोन सप्लाई रूट और साइबर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते इस नेटवर्क को तोड़कर एक बड़े हादसे को टाल दिया है।



