केरल में एक बार फिर निपाह वायरस ने दस्तक दे दी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। अब तक 425 लोगों को निगरानी में रखा गया है, जो संभावित रूप से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई है, जिसमें संक्रमण रोकने के लिए विशेष रणनीतियों पर चर्चा की गई।
राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमें भेज दी हैं और कंटेनमेंट जोन घोषित किए जा चुके हैं। स्कूलों और कॉलेजों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। निपाह वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने वाला खतरनाक वायरस है, जिससे ब्रेन इंफेक्शन और मौत तक हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अब तक संक्रमित या संदिग्ध लोगों के प्राथमिक संपर्कों की पहचान कर ली गई है। इन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है और उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन ने अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाए हैं और डॉक्टरों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
निपाह वायरस चमगादड़ों से फैलने वाली एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर 70% से भी अधिक हो सकती है। यह वायरस इंसानों में तेज बुखार, सिरदर्द, उलझन, दौरे और कोमा जैसी गंभीर लक्षणों के साथ सामने आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी इंसान से इंसान में भी फैल सकती है, जिससे सामुदायिक संक्रमण का खतरा बना रहता है।
केरल सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं लेकिन पूरी सतर्कता बरतें। बिना पके फल खाने से बचें, बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें। स्वास्थ्य विभाग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं ताकि लोग लक्षण दिखने पर तुरंत संपर्क कर सकें।



