
पाकिस्तान की दोहरी नीति एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर हो गई है। हाल ही में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में तबाह किया गया लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय अब दोबारा खड़ा किया जा रहा है। पाकिस्तान सरकार ने इसके रिनोवेशन के लिए करोड़ों रुपये जारी कर दिए हैं। यह मुख्यालय लाहौर के पास मुरीदके इलाके में स्थित है और लंबे समय से लश्कर की गतिविधियों का गढ़ माना जाता है। आतंकियों का यह ठिकाना भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में आतंकी घटनाओं की साजिश रचने का केंद्र रहा है।
भारत ने बार-बार पाकिस्तान को सबूतों के साथ आगाह किया है कि उसकी धरती से चल रहा आतंकवाद न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि पूरी दुनिया को अस्थिर कर रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान सरकार का यह कदम यह साबित करता है कि वह आतंकी संगठनों को खत्म करने की बजाय उन्हें संरक्षण और समर्थन देती है। इस रिनोवेशन कार्य में लाखों डॉलर की लागत बताई जा रही है, जिसे सीधे सरकारी खजाने से वहन किया जा रहा है। इससे यह साफ है कि पाकिस्तान की नीतियां अभी भी आतंकवाद पोषित करने वाली हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह हरकत उसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को और धूमिल करेगी। एक ओर वह वैश्विक मंचों पर खुद को आतंक के खिलाफ लड़ने वाला देश बताता है, वहीं दूसरी ओर आतंकी अड्डों को पुनर्जीवित करने में पैसा खर्च करता है। भारत के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि लश्कर-ए-तैयबा जैसी आतंकी संगठन पहले भी मुंबई हमले जैसे बड़े हमलों में शामिल रहे हैं। अगर ऐसे संगठनों को दोबारा ताकत मिलती है, तो यह क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित होगा।
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा और किसी भी कीमत पर आतंकियों को पनपने नहीं देगा। लेकिन पाकिस्तान का रवैया यह दर्शाता है कि वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय दबावों को नजरअंदाज कर अपने पुराने रास्ते पर चल रहा है। यही वजह है कि कई रक्षा विशेषज्ञ इसे “नहीं सुधरेगा पाकिस्तान” वाली मानसिकता का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं।
इस घटनाक्रम से एक बार फिर यह साबित हो गया है कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई तभी संभव होगी, जब पाकिस्तान जैसे देशों को कठोर आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़े। अन्यथा, करोड़ों रुपये लगाकर आतंक के अड्डों को नया जीवन देने की यह प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होगी और निर्दोष लोगों की जानें दांव पर लगती रहेंगी।



