पाकिस्तान ने चीन से J-35A स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने की योजना को अचानक टाल दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल तेज हो गई है। यह वही फाइटर जेट है जिसे चीन अपनी अगली पीढ़ी की वायु शक्ति के रूप में प्रमोट कर रहा था और पाकिस्तान इसे भारतीय राफेल जेट्स के मुकाबले खड़ा करना चाहता था।
सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय के पीछे अमेरिका का रणनीतिक दबाव सबसे बड़ी वजह हो सकता है। पाकिस्तान पर पहले से ही एफएटीएफ, आईएमएफ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का आर्थिक दबाव है। अगर उसने चीन से हाई-टेक हथियार प्रणाली ली होती, तो अमेरिका और पश्चिमी देशों की नाराजगी और बढ़ जाती।
इसके अलावा, पाकिस्तान की वित्तीय हालत भी इस डील को झेलने लायक नहीं है। J-35A जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की कीमत, मेंटेनेंस और ट्रेनिंग का खर्च बहुत अधिक होता है। ऐसे में पाक सरकार को डिफेंस बजट पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पाकिस्तान अभी किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर दिखना नहीं चाहता, खासकर तब जब वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर “बैलेंस पॉलिसी” की बात करता है। चीन की ओर झुकाव से अमेरिका से दूरी और सुरक्षा सहायता में कटौती का खतरा था।
अब देखना होगा कि क्या पाकिस्तान भविष्य में इस डील को फिर से शुरू करता है या अपनी रक्षा रणनीति में कोई और बड़ा बदलाव लाता है।



