
23 जनवरी को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को “पराक्रम दिवस” के रूप में मनाने की तैयारी कर रहा है और इस वर्ष यह आयोजन और भी खास होने वाला है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अवसर पर कोलकाता में आयोजित होने वाले भव्य समारोह में शामिल हो सकते हैं। केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से नेताजी के जन्मस्थल और उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों पर कई कार्यक्रम तय किए गए हैं। कार्यक्रम की शुरुआत नेताजी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने से होगी, जिसके बाद एक राष्ट्रीय स्तर का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें आज़ादी के आंदोलन से जुड़े गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियां दी जाएंगी। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस मंच से देश को संबोधित भी कर सकते हैं, जहां वे नेताजी के योगदान, उनके साहस और देशभक्ति को याद करते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेंगे।
इस बार के आयोजन में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त भागीदारी भी देखने को मिल सकती है, जिससे नेताजी की आज़ाद हिंद फौज को विशेष श्रद्धांजलि दी जाएगी। पराक्रम दिवस के तहत देशभर में स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी नेताजी के विचारों और उनके बलिदान से प्रेरणा ले सके। कोलकाता में मुख्य कार्यक्रम के साथ-साथ दिल्ली और अंडमान-निकोबार में भी श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किए जाने की योजना है। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह नेताजी से विशेष रूप से जुड़ा रहा है, क्योंकि यहीं उन्होंने पहली बार तिरंगा फहराया था।
सरकार की ओर से यह भी संकेत मिले हैं कि इस मौके पर नेताजी से जुड़े कुछ दुर्लभ दस्तावेजों और डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जा सकता है, जिससे लोग उनके जीवन और संघर्ष को और करीब से जान सकें। इसके अलावा, युवाओं के लिए विशेष सेमिनार और संवाद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी का इस समारोह में शामिल होना न केवल नेताजी को एक बड़ी श्रद्धांजलि होगी, बल्कि देशवासियों में राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करने का काम भी करेगा। 23 जनवरी का यह दिन एक बार फिर यह याद दिलाएगा कि आज़ादी की राह में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान अमूल्य था और उनका सपना एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत का था, जिसे पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।



