
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रेरक संबोधन में ‘वंदे मातरम’ के नारे को भारत की आत्मा और जनशक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आज हम जिस मुकाम पर खड़े हैं, वह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों की आस्था, विश्वास और समर्पण का परिणाम है। प्रधानमंत्री ने कहा, “लाखों लोगों ने वंदे मातरम का नारा लगाया, उसी से हमें शक्ति मिली, उसी विश्वास ने हमें यहां तक पहुंचाया।” उनका संबोधन राष्ट्रभक्ति, एकता और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से ओत-प्रोत रहा।
पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम केवल दो शब्द नहीं, बल्कि यह भारत की चेतना है, जो हर भारतीय को जोड़ती है। यह नारा आजादी के संघर्ष से लेकर आज के विकसित भारत के सपने तक हमारी यात्रा का साक्षी रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देशहित को सर्वोपरि रखें और भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी तकनीक, नवाचार और परिश्रम के बल पर देश का भविष्य तय करेगी।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने राष्ट्र की एकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब देश एक स्वर में बोलता है, तो दुनिया उसकी आवाज सुनती है। वंदे मातरम का उद्घोष हमें यही सिखाता है कि मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के लिए काम करना ही सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों की भी चर्चा की और कहा कि यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से संकल्प लेने को कहा कि हम सभी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भाव के साथ देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों भारतीय एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। ‘वंदे मातरम’ के जयघोष के साथ उनका संबोधन समाप्त हुआ, जिसने पूरे माहौल को गर्व और उत्साह से भर दिया।



