
राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेले की रौनक इन दिनों अपने चरम पर है। हर साल की तरह इस बार भी यहां देश-विदेश से लाखों की संख्या में पर्यटक और व्यापारी पहुंचे हैं। ऊंट, घोड़े और पशुओं की खरीद-फरोख्त के साथ-साथ धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का संगम इस मेले को खास बनाता है। लेकिन इस बार पुष्कर मेला 2025 की एक नई चर्चा सामने आई है—अब घोड़ों की बिक्री पर टैक्स देना होगा। राजस्थान सरकार ने मेले में एक विशेष GST कैंप स्थापित किया है, जहां घोड़ा व्यापारियों को अपनी बिक्री का हिसाब दर्ज कर टैक्स चुकाना होगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, मेले में घोड़ों और ऊंटों की बड़ी संख्या में खरीद-फरोख्त होती है, जिससे करोड़ों रुपये का लेन-देन होता है। ऐसे में राजस्व को पारदर्शी बनाने और टैक्स चोरी पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। व्यापारियों को यहां बिक्री रजिस्ट्रेशन और GST भुगतान की प्रक्रिया समझाने के लिए विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद है। सरकार का कहना है कि यह कदम न केवल टैक्स सिस्टम को मजबूत करेगा बल्कि व्यापारियों के लिए पारदर्शी लेन-देन की सुविधा भी प्रदान करेगा।
स्थानीय व्यापारी वर्ग में इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ व्यापारी इसे सरकार की राजस्व बढ़ाने की दिशा में सराहनीय कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर इसका बोझ बढ़ेगा। वहीं, प्रशासन का मानना है कि GST लागू होने से व्यापारिक प्रक्रिया संगठित होगी और मेले में होने वाले अवैध लेन-देन पर अंकुश लगेगा।
पुष्कर मेला न केवल व्यापार का केंद्र है बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति, कला और परंपरा का भी प्रतीक है। ऐसे में सरकार का यह कदम मेले को आधुनिकता और पारदर्शिता की दिशा में ले जाने वाला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखने योग्य होगा कि यह टैक्स व्यवस्था मेले की अर्थव्यवस्था पर कैसा असर डालती है।



