विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले को लेकर बेहद गंभीर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हमला न केवल निर्दोष लोगों की जान लेने की साजिश थी, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही गंभीर उद्देश्य — धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देना — छिपा हुआ था। जयशंकर ने कहा कि यह हमला यह दिखाता है कि आतंकवाद सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता पर सीधा हमला है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अब आतंकवाद के खिलाफ और भी ज्यादा सख्त रवैया अपनाना होगा। “हमारी चुप्पी या सहनशीलता को कमजोरी न समझा जाए। अब समय आ गया है कि हम आतंकवाद को जड़ से खत्म करें, चाहे वो किसी भी सीमा के पार से संचालित हो या अंदर से उभरता हो।”
एस. जयशंकर ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब पूरे देश में इस हमले को लेकर आक्रोश और शोक की लहर है। पहलगाम, जो अमरनाथ यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव है, वहां पर निर्दोष यात्रियों को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि आतंकी संगठनों का मकसद सिर्फ हिंसा नहीं, धार्मिक सद्भाव को भी खत्म करना है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि आतंकवाद को धर्म या राजनीति के चश्मे से देखने के बजाय इसे मानवता के खिलाफ अपराध के रूप में देखा जाए और इसके खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई की जाए।
जयशंकर का यह बयान भारत की नीति में एक सख्त और स्पष्ट बदलाव की ओर इशारा करता है — अब आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह कहीं से भी संचालित हो।



