केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में देश में खाद्यान्न की स्थिति पर बयान देते हुए कहा कि देश में खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि गेहूं, दाल, चावल और फल-सब्जियों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कदम उठाए हैं और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रयासरत है।
गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार
शिवराज सिंह चौहान ने अपने बयान में बताया कि देश में केंद्र सरकार के गोदामों में लाखों टन गेहूं और चावल का स्टॉक मौजूद है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों को नियमित रूप से राशन दिया जा रहा है और आगे भी इसमें कोई रुकावट नहीं आएगी। सरकार ने अनाज वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली को भी सख्ती से लागू किया है।
दाल और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की स्थिति
दालों की आपूर्ति को लेकर भी केंद्रीय कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार के पास तूर, मसूर, उड़द और चना जैसी दालों का अच्छा-खासा भंडार है। आयात के जरिए भी आपूर्ति को बनाए रखा जा रहा है ताकि बाज़ार में कीमतें स्थिर रहें और उपभोक्ताओं को राहत मिले। उन्होंने बताया कि खासकर गरीब वर्ग को प्रोटीन युक्त आहार उपलब्ध कराने पर सरकार का विशेष ध्यान है।
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फल-सब्जियों की आपूर्ति और मंडियों की निगरानी
फल और सब्जियों को लेकर चौहान ने कहा कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्र स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। किसान मंडियों में सुचारु रूप से अपनी उपज ला पा रहे हैं और सप्लाई चेन मजबूत की गई है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जमाखोरी और कालाबाज़ारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा रही है।
जनता से अपील – अफवाहों से बचें
शिवराज सिंह चौहान ने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। “खाद्यान्न की कोई कमी नहीं है। किसी भी प्रकार की घबराहट में खरीदारी न करें। सरकार हर जरूरत को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त आपूर्ति बनाए हुए है।” उन्होंने मीडिया से भी आग्रह किया कि वे तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग करें।
सरकार की दीर्घकालिक योजना
मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि सरकार खाद्यान्न सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक योजनाओं पर काम कर रही है। भंडारण क्षमता बढ़ाने, कृषि तकनीक में सुधार और किसान को उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार नीतिगत फैसले लिए जा रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत के तहत कृषि क्षेत्र को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।



