
दुनियाभर में विमानन सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती सामने आई है, क्योंकि सूरज की तीव्र किरणों ने एयरबस के हजारों विमानों के नेविगेशन और तकनीकी सिस्टम पर असर डालना शुरू कर दिया है। इस समस्या के बाद अब करीब 6,000 एयरबस विमानों में सॉफ्टवेयर को बदलने और अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सूर्य से आने वाली विकिरण (solar radiation) आधुनिक विमानों के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर कभी-कभी प्रभाव डाल सकती है। एयरबस का कहना है कि यह समस्या गंभीर नहीं है, लेकिन उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तरों पर सुधार आवश्यक है।
रिपोर्टों के अनुसार, जब विमान ऊँचाई पर उड़ते हैं, तो सूर्य की किरणों का सीधा संपर्क उड़ान नियंत्रण प्रणाली और नेविगेशन सिग्नलों पर हल्का व्यवधान पैदा कर सकता है। यह व्यवधान खासतौर पर उन विमानों में देखा गया, जिनमें कुछ पुराने डिजिटल सिस्टम मौजूद हैं। एयरबस ने विश्वभर की एयरलाइंस को नोटिस जारी कर बताया है कि वह अपने सभी प्रभावित विमानों में नए सॉफ्टवेयर और अपडेटेड सुरक्षा पैच इंस्टॉल करेगी।
एयरलाइंस विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम प्रिवेंटिव यानी रोकथाम के तौर पर उठाया जा रहा है, ताकि भविष्य में बढ़ते सौर तूफानों (solar storms) और विकिरण में संभावित वृद्धि से किसी भी तरह का जोखिम न हो। आधुनिक विमान उच्च-तकनीकी कंप्यूटर नेटवर्क पर चलते हैं, जिनकी संवेदनशीलता प्राकृतिक विकिरण और रेडिएशन से प्रभावित हो सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि आधुनिक विमानन कितना उन्नत होने के बावजूद प्रकृति के प्रभावों से पूरी तरह मुक्त नहीं है। एयरबस का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसलिए अपडेट प्रक्रिया तेज़ी से शुरू की गई है। दुनिया भर की बड़ी एयरलाइंस—जैसे लुफ्थांसा, कतर एयरवेज, एयर इंडिया और इंडिगो—भी अपने बेड़े में आवश्यक सुधार कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपडेट आने वाले वर्षों में विमानों को और अधिक सुरक्षित, सक्षम और तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा। जबकि यात्रियों के लिए राहत की बात यह है कि उड़ानों पर इसका बहुत कम प्रभाव पड़ेगा और अधिकांश अपडेट ग्राउंड मेंटेनेंस के दौरान ही पूरे कर लिए जाएंगे।



