
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण खगोल विज्ञान के शौकीनों और आम लोगों दोनों के लिए खास रहने वाला है। हर बार की तरह इस बार भी लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्रहण कब लगेगा, कितने बजे शुरू होगा और क्या यह भारत में दिखाई देगा या नहीं। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। यह घटना हमेशा अमावस्या के दिन होती है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी दृश्यता अलग हो सकती है।
वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार साल का पहला सूर्य ग्रहण निर्धारित तारीख पर लगेगा, जिसकी शुरुआत भारतीय समयानुसार दोपहर बाद मानी जा रही है। हालांकि ग्रहण की सटीक टाइमिंग स्थान के अनुसार बदल सकती है। दुनिया के कुछ हिस्सों में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखाई देगा, जबकि कई जगहों पर आंशिक ग्रहण नजर आएगा। खगोलविदों का कहना है कि उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के कई देशों में लोग इस दुर्लभ नजारे को देख पाएंगे।
भारत की बात करें तो फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह ग्रहण यहां से प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने की संभावना कम है। यदि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देता, तो सूतक काल भी मान्य नहीं माना जाता। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के आधार पर कई लोग फिर भी एहतियात बरतते हैं, जैसे पूजा-पाठ से परहेज, भोजन न बनाना या गर्भवती महिलाओं का विशेष ध्यान रखना।
विशेषज्ञों की सलाह है कि सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। इससे आंखों को स्थायी नुकसान हो सकता है। सुरक्षित तरीके से ग्रहण देखने के लिए सोलर फिल्टर, विशेष चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है। टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भी इस खगोलीय घटना का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।
सूर्य ग्रहण सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक घटना नहीं, बल्कि विज्ञान के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण अवसर होता है। इससे वैज्ञानिकों को सूर्य की बाहरी परत, यानी कोरोना, का अध्ययन करने का मौका मिलता है। ऐसे में यह दिन खगोल प्रेमियों के लिए उत्साह और जिज्ञासा से भरा रहने वाला है।



